भोपाल स्थित Barkatullah University (BU) को हाल ही में नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने ‘A’ ग्रेड दिया है। यह खबर सुनते ही कई छात्रों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने हैरानी जताई। वजह साफ है—यहां शिक्षक कम हैं, इमारतों की हालत खराब है और कई प्रयोगशालाएं खाली पड़ी हैं।
आधे शिक्षक, अधूरी क्लासेस
विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, यहां स्वीकृत पदों की तुलना में सिर्फ आधे शिक्षक ही काम कर रहे हैं। इसका सीधा असर क्लास की गुणवत्ता और छात्रों के मार्गदर्शन पर पड़ रहा है। कई विभाग ऐसे हैं, जहां एक-एक शिक्षक को कई विषय संभालने पड़ रहे हैं।
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टूटी दीवारें और खाली लैब

कैंपस का हाल भी किसी से छिपा नहीं है। कई विभागों की दीवारें टूटी हुई हैं और पुराने उपकरण धूल खा रहे हैं। विज्ञान विभाग में कई लैब या तो अधूरी हैं या पूरी तरह खाली पड़ी हैं, जिससे छात्रों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर असर हो रहा है।
फिर भी मिला ‘A’ ग्रेड—कैसे ?
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NAAC ग्रेड तय करने में सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि अन्य पहलुओं को भी महत्व देता है।
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इसमें शोध कार्य, अकादमिक प्रदर्शन, प्रशासनिक प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को शामिल किया जाता है।
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BU ने शोध प्रकाशन में अच्छा प्रदर्शन किया है।
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पीएचडी गाइडलाइंस का पालन और बेहतर रिसर्च आउटपुट मिला है।
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डिजिटल लाइब्रेरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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इन कारणों से ग्रेडिंग में BU को लाभ मिला।
छात्र और विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?
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कई छात्र मानते हैं कि ग्रेड से ज्यादा जरूरी जमीनी हकीकत है।
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उनका कहना है कि अगर शिक्षक और सुविधाएं पूरी हों तो BU और बेहतर परिणाम दे सकता है।
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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेडिंग सिस्टम में सुधार होना चाहिए।
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उनका सुझाव है कि वास्तविक स्थितियों को भी अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
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