BRICS India 2026: भारत आज से हरियाणा के गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स (BRICS) ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। दो दिनों तक चलने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीकों और टिकाऊ विकास को लेकर सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन भविष्य की वैश्विक ऊर्जा रणनीति तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत अहम आयोजन
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। वर्ष 2026 के लिए भारत ने अपनी अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है। इसी सोच के अनुरूप ऊर्जा मंत्रियों की यह बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसमें ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाना, सभी देशों तक ऊर्जा की समान पहुंच सुनिश्चित करना और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना प्रमुख एजेंडा रहेगा।
तीन प्रमुख विषयों पर होगा मंथन
इस बैठक में तीन प्रमुख विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
- पहला विषय ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता है। दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यह मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- दूसरा विषय ऊर्जा तक समान पहुंच (Energy Access and Equity) है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकासशील देशों और दूरदराज के इलाकों तक भी किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध हो सके।
- तीसरा विषय प्रौद्योगिकी और नवाचार है। इसमें नई ऊर्जा तकनीकों, स्मार्ट ग्रिड, बैटरी स्टोरेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऊर्जा प्रबंधन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
भारत दिखाएगा अपनी ऊर्जा उपलब्धियां
यह सम्मेलन भारत के लिए अपनी ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखने का भी बड़ा अवसर है। पिछले एक दशक में भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश की सौर ऊर्जा क्षमता में 50 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसके अलावा 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। भारत ने वर्ष 2032 तक लगभग 410 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी तय किया है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सके।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पर रहेगा फोकस
भारत ने हाल के वर्षों में अपने राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को काफी मजबूत किया है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजनाओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पादित सौर और पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। बैठक में भारत इन परियोजनाओं के अनुभव अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करेगा, ताकि ऊर्जा क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा मिल सके।
जैव ईंधन में भी भारत की बड़ी उपलब्धि
भारत ने बायोफ्यूल क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति की है। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में E85 ईंधन को भी बढ़ावा दिया गया है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल का उपयोग होता है। सरकार का मानना है कि इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
वैश्विक ऊर्जा सहयोग में भारत की भूमिका
भारत अब केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का मजबूत समर्थक बनकर उभरा है। भारत की पहल पर शुरू हुआ International Solar Alliance (ISA) आज कई देशों को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जोड़ रहा है। इसी तरह Global Biofuels Alliance के माध्यम से भी भारत स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर भारत इन पहलों को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
भारत लंबे समय से विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों को वैश्विक मंच पर उठाता रहा है। इस बैठक के माध्यम से भारत ग्लोबल साउथ के देशों की प्राथमिकताओं को भी प्रमुखता से सामने रखेगा। इनमें किफायती ऊर्जा, तकनीकी सहयोग, जलवायु वित्त और ऊर्जा परिवर्तन के लिए निवेश जैसे मुद्दे शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन विकासशील देशों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।
11 सदस्य देशों की भागीदारी
BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसमें नए सदस्य शामिल होने के बाद संगठन का दायरा काफी बढ़ गया है। बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। ऊर्जा क्षेत्र में इन देशों का वैश्विक महत्व लगातार बढ़ रहा है, इसलिए इस बैठक के फैसलों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
भविष्य की ऊर्जा नीति पर असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले भविष्य की वैश्विक ऊर्जा नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, हरित तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा रोडमैप तैयार किए जाने की संभावना है। बैठक के अंत में संयुक्त घोषणा-पत्र भी जारी किया जा सकता है, जिसमें सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धताओं का उल्लेख होगा।
Read Related News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक याचिका, बढ़ीं मुश्किलें



