Border Roads Organisation: राजधानी दिल्ली में आयोजित सीमा सड़क संगठन स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल आधुनिक हथियारों से नहीं हैं, बल्कि मजबूत सड़क, सुरंग, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे की मदद से भी जीते जाएंगे। जिसमें उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने कठिन से कठिन इलाकों में शानदार काम किया है। राजनाथ सिंह ने अटल टनल, सेला टनल और उम्लिंग ला जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर देश की सुरक्षा और विकास दोनों के लिए बेहद जरूरी है। सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों को तेजी से विकसित करने पर लगातार काम कर रही है।
भविष्य के युद्धों में बदलेगी रणनीति
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया में युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है। जिसमें पहले जहां केवल सैनिकों और हथियारों की ताकत पर ध्यान दिया जाता था, वहीं अब सैन्य संचालन की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि सेना कितनी तेजी से सीमा तक पहुंच सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में सैनिकों की तैनाती, हथियारों की आपूर्ति और सैन्य संसाधनों की आवाजाही के लिए मजबूत सड़कें और सुरंगें बेहद जरूरी होती हैं। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा तो सेना किसी भी चुनौती का तेजी से सामना कर सकेगी।
‘युद्ध का पहला मोर्चा सड़क भी हो सकती है’
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बात कही है। जिसमें उन्होंने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं बल्कि वह सड़क होती है जो सैनिकों को अग्रिम चौकी तक पहुंचाती है।
मिली जानकारी के अनुसार, सड़क बनाने वाला इंजीनियर और कर्मचारी भी राष्ट्रीय सुरक्षा में उतना ही महत्वपूर्ण योगदान देता है जितना सीमा पर तैनात सैनिक। इसलिए BRO का कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
BRO की उपलब्धियों की जमकर तारीफ
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े छह दशकों में BRO ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार काम किया है। ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क और पुल बनाना आसान नहीं होता, लेकिन BRO ने इसे संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार नई तकनीकों को अपनाकर निर्माण कार्यों को तेज और बेहतर बना रहा है। हाई-एल्टीट्यूड मशीनें, मॉड्यूलर ब्रिज, प्रीकास्ट तकनीक और आधुनिक टनलिंग सिस्टम जैसे नवाचारों ने निर्माण की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार किया है।
अटल टनल, सेला टनल और उम्लिंग ला का किया उल्लेख
बता दें अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने देश की कई बड़ी रणनीतिक परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने अटल टनल, सेला टनल और उम्लिंग ला सड़क जैसी परियोजनाओं को भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इन परियोजनाओं ने न केवल सीमावर्ती इलाकों में आवागमन आसान बनाया है बल्कि सेना की परिचालन क्षमता को भी काफी मजबूत किया है। खासकर कठिन मौसम और बर्फबारी के दौरान इनका महत्व और बढ़ जाता है।
टनलिंग तकनीक से आया बड़ा बदलाव
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक टनलिंग तकनीक ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में नई क्रांति ला दी है। पहले जहां पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण में कई साल लग जाते थे, वहीं अब सुरंगों के जरिए यात्रा का समय कम हो रहा है और सेना की आवाजाही भी पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है। जिसमें उन्होंने कहा कि यही तकनीक अब शहरों में मेट्रो निर्माण से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं तक हर क्षेत्र में उपयोग की जा रही है।

सरकार की प्राथमिकता बना सीमावर्ती विकास
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितनी आवश्यकता थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाला कोई भी नागरिक खुद को मुख्यधारा से अलग महसूस न करे। इसके लिए सड़क, बिजली, संचार और अन्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का भी किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले जिन गांवों को देश का आखिरी गांव कहा जाता था, उन्हें अब वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत देश का पहला गांव बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बेहतर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि वहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो और सीमाई क्षेत्र मजबूत बने रहें।
2047 के विकसित भारत का रखा लक्ष्य
रक्षा मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार केवल वर्तमान की जरूरतों को नहीं बल्कि आने वाले कई दशकों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। जिसमें उन्होंने कहा कि आज बनने वाली सड़कें, पुल और सुरंगें केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं बल्कि आने वाली एक या दो शताब्दियों तक भारत के विकास की नींव बनेंगी। मजबूत बुनियादी ढांचा ही विकसित भारत का आधार बनेगा।
कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य
इस वर्ष आयोजित BRO Strategic Infrastructure Conclave का मुख्य विषय था “क्षमता विस्तार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और निष्पादन उत्कृष्टता”। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बेहतर कनेक्टिविटी केवल विकास का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की भी सबसे मजबूत आधारशिला है।
एक्सपर्ट्स ने आधुनिक तकनीकों के उपयोग, तेज निर्माण कार्य, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमाई क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी पर विस्तार से चर्चा की।
BRO क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
सीमा सड़क संगठन भारत के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संगठनों में से एक है। यह संगठन सीमावर्ती राज्यों और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, पुल, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करता है। इसके कार्यों से सेना को तेजी से तैनाती में मदद मिलती है और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर संपर्क सुविधाएं मिलती हैं। आज BRO केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी इंजीनियरिंग क्षमता और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं के लिए पहचान बना चुका है।
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