Yamuna Bazar Bulldozer Action: राजधानी दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में बुधवार सुबह से दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। निगमबोध घाट के पास स्थित यमुना बाढ़ क्षेत्र (O-Zone) में बने कथित अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाए गए। कार्रवाई से पहले पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। इस अभियान का सबसे बड़ा असर यहां रहने वाले करीब 310 परिवारों पर पड़ रहा है। वर्षों से इस इलाके में रह रहे लोगों के सामने अब अपने घर और रोज़गार दोनों बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद की जा रही है।
सुबह से शुरू हुआ बुलडोजर अभियान
बुधवार सुबह प्रशासन की टीमें बुलडोजर, जेसीबी और अन्य मशीनों के साथ यमुना बाजार पहुंचीं। इसके साथ ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने पहले पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की और फिर चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। किसी भी विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह से ही इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ था।
310 मकानों पर कार्रवाई
DDA के अनुसार यमुना बाजार के इस हिस्से में लगभग 310 आवासीय ढांचे बने हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये सभी निर्माण यमुना के बाढ़ क्षेत्र में स्थित हैं और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की श्रेणी में आते हैं। दिल्ली सरकार और DDA का कहना है कि यह इलाका पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है तथा यहां किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार यह अभियान दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में चलाया जा रहा है। DDA ने बताया कि 2 जून को सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों को 23 जून तक क्षेत्र खाली करने का समय दिया गया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि निर्धारित समय सीमा के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इससे पहले दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने भी मई में नोटिस जारी कर बाढ़ के खतरे का हवाला देते हुए लोगों को क्षेत्र खाली करने को कहा था।
प्रशासन का क्या कहना है?
DDA का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। प्रशासन के अनुसार संबंधित लोगों को पहले नोटिस दिए गए, आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया और उसके बाद ही कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण बढ़ने से पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
लोगों में बेघर होने का डर
दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवारों का आरोप है कि उन्हें वैकल्पिक आवास की स्पष्ट व्यवस्था नहीं बताई गई। उनका कहना है कि अचानक घर टूटने की स्थिति में उनके सामने रहने और रोज़गार दोनों का संकट खड़ा हो जाएगा। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने चिंता जताई कि उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
रोज़गार पर भी पड़ेगा असर
यमुना बाजार केवल एक रिहायशी इलाका नहीं है। यहां रहने वाले कई परिवार निगमबोध घाट, मंदिरों, नाव संचालन, छोटे व्यापार, पूजा-पाठ, नाई का काम और दिहाड़ी मजदूरी जैसे व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घर टूटने के साथ उनका रोजगार भी प्रभावित होगा।
DDA की बड़ी योजना
प्रशासन के अनुसार यमुना बाजार क्षेत्र को भविष्य में एक सांस्कृतिक और विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत यमुना के किनारे स्थित घाटों का पुनर्विकास, सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार और नदी तट के संरक्षण पर काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना भी है।
पर्यावरण और सुरक्षा दोनों का मुद्दा
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यमुना का यह इलाका हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की चपेट में आता है। ऐसे में यहां बड़ी आबादी का रहना जोखिम भरा माना जाता है। प्रशासन का तर्क है कि लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पहले पुनर्वास दिया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अधिकारियों के अनुसार अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अगले कुछ दिनों तक भी कार्रवाई जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। वहीं प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि सरकार उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी जल्द फैसला करेगी।
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