Devendra Fadnavis News: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर से चर्चाओं के केंद्र में है। बता दें की इस बार वजह बने हैं शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत। जिसमें उन्होंने दावा किया है कि यदि केंद्र सरकार में आने वाले समय में मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी दिखाई देगा। राउत का कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है और ऐसे में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। हालांकि, यह केवल संजय राउत का दावा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) या केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।
नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया बयान
संजय राउत नागपुर में अपनी पार्टी के प्रस्तावित ‘राम रक्षा आंदोलन’ की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर सवाल पूछा।
इस पर राउत ने कहा कि अगर केंद्र सरकार में कैबिनेट विस्तार होता है, तो महाराष्ट्र में भी राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को देश की सेवा के लिए दिल्ली भेजा जा सकता है और उनकी जगह बीजेपी का कोई वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने किसी संभावित नए मुख्यमंत्री का नाम नहीं लिया और न ही अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस आधार पेश किया।
BJP की ओर से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया
संजय राउत के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर तेज हो गई है, लेकिन बीजेपी की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने भी इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के बयान अक्सर बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले चर्चा का विषय बन जाते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होता है।
‘राम रक्षा आंदोलन’ को लेकर भी बोले संजय राउत
नागपुर दौरे के दौरान संजय राउत ने 18 जुलाई से शुरू होने वाले ‘राम रक्षा आंदोलन’ की जानकारी भी दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
राउत ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य राम भक्तों की आस्था की रक्षा करना और पारदर्शिता की मांग करना है। उन्होंने दावा किया कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जवाबदेही से जुड़ा अभियान है।

RSS और BJP नेताओं को भी भेजा गया निमंत्रण
संजय राउत ने कहा कि ‘राम रक्षा आंदोलन’ में सभी हिंदुत्ववादी संगठनों को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी निमंत्रण भेजा गया है। जिसमें उन्होंने कहा कि यदि मोहन भागवत स्वयं कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते हैं तो वे अपने किसी प्रतिनिधि को भेज सकते हैं। इसके अलावा बीजेपी के नेताओं, स्थानीय विधायकों और अन्य राजनीतिक दलों को भी कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया गया है।
राउत के अनुसार विदर्भ के सभी 11 जिलों से बड़ी संख्या में राम भक्त और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे।
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का समर्थन
संजय राउत ने संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र पर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसद सत्र शुरू होने से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाना उचित कदम होगा। राउत ने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस की इस मांग से सहमत है और इस विषय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
लोकसभा सीटें बढ़ाने की चर्चा भी तेज
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में संविधान संशोधन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस विषय पर अंतिम निर्णय या आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।
सोनम वांगचुक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
संजय राउत ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और भूख हड़ताल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती सेहत के बावजूद केंद्र सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है। राउत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए और सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि वहां केवल सोनम वांगचुक ही नहीं बल्कि एक युवा महिला भी भूख हड़ताल पर बैठी है, लेकिन उनकी स्थिति पर सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है।
क्या सचमुच बदल सकता है महाराष्ट्र का नेतृत्व?
बता दें की फिलहाल देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने या महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। संजय राउत का बयान राजनीतिक चर्चा जरूर पैदा कर रहा है, लेकिन इसे अभी केवल एक राजनीतिक दावा माना जा रहा है।
यदि भविष्य में केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तब यह साफ हो पाएगा कि महाराष्ट्र की राजनीति में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है या नहीं। तब तक सभी राजनीतिक दलों और जनता की नजर आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर बनी रहेगी।



