SIR Supreme Court: वोटर लिस्ट और नागरिकता को लेकर लोगों के बीच बने भ्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए स्थिति साफ कर दी है। जिसमें अदालत ने कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची (Voter List) में नहीं है या विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान उसका नाम हट जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो गई है।
जानकारी के लिए बता दें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग (Election Commission) के पास नहीं है। चुनाव आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची तैयार करने, उसका संशोधन करने और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं तक सीमित है। नागरिकता से जुड़े मामलों के लिए कानून में अलग प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?
दरअसल आज शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाता है या किसी प्रक्रिया के दौरान उसे बाहर कर दिया जाता है, तो केवल इसी आधार पर उसकी नागरिकता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकारों की एक सीमा है। आयोग मतदाता सूची का प्रबंधन करता है, लेकिन किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक घोषित करना या उसकी नागरिकता खत्म करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
अगर विवाद हो तो क्या होगी प्रक्रिया?
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यदि किसी मामले में संबंधित ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति के बारे में ऐसा निर्णय देता है जिससे नागरिकता का प्रश्न उठता है, तो चुनाव आयोग स्वयं कोई फैसला नहीं करेगा।
ऐसी स्थिति में आयोग को मामला संबंधित मंत्रालय के पास भेजना होगा, जहां कानून के अनुसार नागरिकता से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसका अर्थ है कि नागरिकता का फैसला केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल की याचिका पर होगी आगे सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से जुड़ी SIR प्रक्रिया पर दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका में मांग की गई है कि विधानसभा क्षेत्रवार SIR से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।
इस सुनवाई में SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची के संशोधन और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे चर्चा होने की संभावना है।

पहले भी स्पष्ट कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
बता दें की यह पहला मौका नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर टिप्पणी की है। इससे पहले भी अदालत साफ कर चुकी है कि चुनाव आयोग का काम चुनाव कराना और मतदाता सूची का रखरखाव करना है। नागरिकता से जुड़े विवादों का निपटारा संबंधित कानून और सक्षम प्राधिकरण द्वारा ही किया जाएगा।
अदालत की ताजा टिप्पणी ने उन लोगों की चिंता काफी हद तक दूर कर दी है जो यह मान रहे थे कि वोटर लिस्ट से नाम हटते ही उनकी नागरिकता समाप्त हो जाएगी।
लोगों के बीच क्यों फैला भ्रम?
दरअसल हाल ही के दिनों में देश के कई हिस्सों में SIR प्रक्रिया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आईं। जिसमें सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे संदेश वायरल हुए जिनमें दावा किया गया कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं रहा तो उसकी नागरिकता भी खत्म हो जाएगी। इसी तरह की अफवाहों के कारण कई लोगों में डर और भ्रम की स्थिति बन गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मतदाता सूची और नागरिकता दोनों अलग-अलग कानूनी विषय हैं और एक का दूसरे पर स्वतः प्रभाव नहीं पड़ता।
झारखंड का वायरल वीडियो भी चर्चा में
इसी बीच झारखंड का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में दावा किया गया कि SIR फॉर्म भरवाने के नाम पर लोगों से 50 से 100 रुपये तक लिए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि यह रकम “खर्चा-पानी” के नाम पर वसूली जा रही थी और लोगों को यह कहकर डराया जा रहा था कि फॉर्म नहीं भरने पर उनकी नागरिकता पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस तरह के दावों की जांच अलग स्तर पर की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसे दावों को कानूनी आधार नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग की भूमिका क्या है?
भारतीय चुनाव आयोग का मुख्य कार्य देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। इसके अलावा आयोग मतदाता सूची तैयार करता है, समय-समय पर उसमें संशोधन करता है और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने या अपात्र पाए जाने पर हटाने की प्रक्रिया अपनाता है। लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना या उसे नागरिकता से वंचित करना आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
नागरिकों के लिए क्या है संदेश?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए। यदि किसी कारणवश किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने या सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
ऐसी स्थिति में नागरिकता समाप्त होने जैसी बातों से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि नागरिकता और मतदाता सूची दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
क्या है SIR प्रक्रिया?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की प्रक्रिया है। इसके तहत पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, गलत या दोहराव वाले रिकॉर्ड हटाए जाते हैं और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को सही रखना है, न कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना।



