Farmers Protest 2026: भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में पंजाब से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों और सरकार के बीच तनाव से राहत भरी खबर आई है। बताया जा रहा है हरियाणा सरकार ने किसानों की दो अहम मांगों को मान लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सहमति दी है।
जानकारी के लिए बता दें सरकार के इस कदम से लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि जब तक लिखित आदेश और ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली कूच के दौरान शंभू बॉर्डर पर रोके गए किसान
बता दें की आज मंगलवार सुबह पंजाब के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए। जिसमें किसान बसों, जीपों, मिनी बसों और निजी वाहनों के जरिए फतेहगढ़ साहिब से निकले थे। उनका उद्देश्य भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें रखना था। लेकिन हरियाणा पुलिस ने सुबह ही करीब साढ़े पांच बजे शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर हाईवे को दोनों ओर से बंद कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद किसानों को शंभू बॉर्डर पर ही रुकना पड़ा और उन्होंने वहीं अपना डेरा जमा लिया।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पहले से थी सख्त
दिल्ली में पहले से ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। अब ऐसे में प्रशासन किसी भी नए बड़े प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था की चुनौती से बचना चाहता था। इसी वजह से केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार ने किसानों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाने की कोशिश शुरू की। जिसमें माना जा रहा है कि सरकार नहीं चाहती कि किसानों का आंदोलन राजधानी तक पहुंचे और स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण हो।
हरियाणा सरकार से किसानों की अहम बैठक
दरअसल दिल्ली कूच के बीच किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मुलाकात की। इस बैठक में अंबाला के उपायुक्त (डीसी) भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान किसानों ने सरकार को अपना मांग पत्र सौंपा। इसमें दो प्रमुख मांगों को प्राथमिकता दी गई हैं। जिनमें दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई और सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाने की बात कही।
किसानों की दो प्रमुख मांगें क्या थीं?
मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में किसानों ने सरकार के सामने दो अहम मांगें रखीं। जिसमें पहली मांग किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की जल्द रिहाई की थी। किसानों का कहना है कि उनके नेता की रिहाई आंदोलन के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, दूसरी मांग केंद्र सरकार के साथ औपचारिक और समयबद्ध वार्ता शुरू कराने की थी। किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि केंद्र सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए।
सरकार ने क्या दिया आश्वासन?
बैठक के बाद हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार किसानों की दोनों मांगों को लेकर सकारात्मक है। उन्होंने बताया कि गुरनाम सिंह चढूनी की जल्द रिहाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बैठक आयोजित कराने का भी आश्वासन दिया गया है। ऐसे में सरकार का कहना है कि बातचीत के जरिए ही सभी मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है।

केंद्रीय कृषि मंत्री करेंगे किसानों से मुलाकात
सरकार की ओर से सबसे बड़ा संकेत यह मिला है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करेंगे।
किसान लंबे समय से केंद्र सरकार के साथ औपचारिक बैठक की मांग कर रहे थे। ऐसे में यदि यह बैठक तय समय पर होती है तो आंदोलन के समाधान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि संवाद शुरू होने से दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ेगा और कई विवादित मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना भी बढ़ सकती है।
आंदोलन जारी रहेगा
बताया जा रहा है की सरकार के आश्वासन के बावजूद भी किसान संगठनों ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। जिसमें किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार अपने वादों को लिखित रूप में लागू नहीं करती और ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक उनका धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
किसानों का कहना है कि पहले भी कई बार आश्वासन मिले, लेकिन कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। इसलिए इस बार वे केवल घोषणा पर भरोसा नहीं करेंगे।
ट्रेड डील को लेकर किसानों की चिंता
किसानों का विरोध मुख्य रूप से भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि इस समझौते में कृषि क्षेत्र से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल किए गए, जिनसे विदेशी कृषि उत्पादों को अधिक छूट मिले, तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों की आय और कृषि बाजार पर पड़ सकता है।
इसी वजह से किसान चाहते हैं कि सरकार ट्रेड डील से जुड़े सभी मुद्दों पर पारदर्शिता बनाए और किसानों से चर्चा करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला ले।
अब आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच प्रस्तावित बैठक पर टिकी है। यदि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक सफल रहती है और सरकार अपने आश्वासनों पर अमल करती है, तो आंदोलन का समाधान निकल सकता है।
वहीं यदि बातचीत बेनतीजा रहती है, तो किसान संगठन अपने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर सकते हैं। फिलहाल शंभू बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं और सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।



