Iran US Peace Deal: मिडिल ईस्ट से दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बता दें की लंबे समय से तनाव और युद्ध जैसे हालात झेल रहे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने बड़ा संकेत दिया है। जिसमें ईरान का कहना है कि अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर तक लाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि ईरान ने साफ कह दिया है कि सुरक्षा और रणनीतिक हालात अभी भी पहले जैसे नहीं होंगे।
जानकारी के लिए बता दें की दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पिछले कई महीनों से तनाव का केंद्र बना हुआ था। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते विवाद, सैन्य गतिविधियों और हमलों के खतरे की वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई थी। इसका असर सीधे तौर पर तेल सप्लाई, गैस व्यापार और वैश्विक बाजारों पर पड़ा।
क्या है ईरान का नया बयान?
ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, होर्मुज को लेकर शुरुआती स्तर पर एक सहमति बनती दिखाई दे रही है। वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 30 दिनों के भीतर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को धीरे-धीरे सामान्य स्तर तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। हालांकि ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम का मतलब यह नहीं होगा कि होर्मुज पूरी तरह युद्ध-पूर्व स्थिति में लौट आएगा। सुरक्षा संबंधी चिंताएं और रणनीतिक निगरानी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त रहेंगी। तसनीम एजेंसी ने पश्चिमी मीडिया की उन रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि होर्मुज पूरी तरह सामान्य होने जा रहा है। ईरान का कहना है कि फिलहाल समझौता सीमित दायरे में है और इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल इसी मार्ग के जरिए एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। यही वजह है कि होर्मुज में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। पिछले कुछ महीनों में युद्ध जैसे हालात बनने के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते का इस्तेमाल कम कर दिया था। जहाजों को लंबा समुद्री रास्ता अपनाना पड़ रहा था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए। बीमा कंपनियों ने भी खतरे को देखते हुए प्रीमियम बढ़ा दिए थे।
तेल बाजार पर क्या पड़ा असर?
होर्मुज में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। जिसमें कई देशों को ईंधन सप्लाई को लेकर चिंता सताने लगी थी। तेल कंपनियों और जहाज मालिकों को डर था कि कहीं उनके जहाज हमलों का निशाना न बन जाएं। इस वजह से वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर दिखाई दिया। अब अगर जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य होती है तो तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के कुछ अन्य देशों के बीच एक समझौता लगभग तय हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस संभावित डील में होर्मुज को फिर से खोलना भी शामिल है और इसका आधिकारिक ऐलान जल्द किया जा सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हलचल बढ़ गई है।
पाकिस्तान की भूमिका भी आई सामने
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा कि उनके देश ने ईरान के नेताओं से बातचीत की है और बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही अगले दौर की बातचीत हो सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए कई देश बैकडोर डिप्लोमेसी में जुटे हुए हैं। पाकिस्तान भी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
ब्रिटेन ने क्या कहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने भी अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत को सकारात्मक बताया है। स्टार्मर ने कहा कि दुनिया को ऐसे समझौते की जरूरत है जो युद्ध जैसे हालात खत्म करे और होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित बनाए। ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देशों की चिंता यह है कि अगर होर्मुज में तनाव जारी रहा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत को कैसे होगा फायदा?
होर्मुज का रास्ता सामान्य होने से भारत को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। रास्ता सुरक्षित होने पर तेल सप्लाई बेहतर होगी, शिपिंग और बीमा खर्च कम होगा और आयात सस्ता पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घटेगा। साथ ही निर्यात-आयात व्यापार तेज होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
अब अगर ईरान और अन्य देशों के बीच यह समझौता सफल रहता है और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई देगा। तेल और गैस की सप्लाई सुधरेगी, ऊर्जा संकट कम होगा और वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौट सकती है। जिन देशों की अर्थव्यवस्था तेल आयात पर निर्भर है, उन्हें सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
ऐसे में एक्सपर्ट्स भी मान रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। जिससे आने वाले 30 दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि ईरान अपने वादे को किस तरह लागू करता है और अंतरराष्ट्रीय समझौते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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