Jaipur Roof Collapse: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को एक बड़ा निर्माण हादसा सामने आया। शहर के जेएलएन मार्ग स्थित फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (FTI) परिसर में निर्माणाधीन भवन की पहली मंजिल की छत अचानक ढह गई। हादसे के समय कई मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। छत गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और करीब 10 मजदूर मलबे में दबकर घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभी घायल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट परिसर में वन विभाग की ओर से एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का निर्माण किया जा रहा है। सोमवार को पहली मंजिल की छत की ढलाई का काम चल रहा था। इसी दौरान स्लैब अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। कई मजदूर मलबे में दब गए, जबकि कुछ लोग जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे।
राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और एम्बुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। स्थानीय लोगों और निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाकर सभी घायलों को बाहर निकाला गया। घायलों को तुरंत एसएमएस अस्पताल भेजा गया, जहां विभिन्न विभागों के डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार किसी भी घायल की स्थिति फिलहाल गंभीर नहीं बताई गई है।
मजदूरों ने बताई हादसे की कहानी
घायल मजदूरों के अनुसार, काम लगभग पूरा होने वाला था। तभी अचानक छत का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया और देखते ही देखते पूरा स्लैब ढह गया। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर चीख-पुकार मच गई। साथी मजदूरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी।
हादसे की वजह क्या थी?
फिलहाल छत गिरने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रारंभिक स्तर पर निर्माण संबंधी तकनीकी खामी या सहारा देने वाली संरचना (सपोर्ट सिस्टम) के कमजोर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हादसा तकनीकी कारणों से हुआ या कहीं निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई थी।
अधिकारियों ने क्या कहा?
फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की निदेशक आकांक्षा चौधरी ने बताया कि परिसर में वन विभाग के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत की ढलाई के दौरान स्लैब गिर गया, जिसके बाद तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि सभी घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अस्पताल में चल रहा इलाज
एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में घायलों का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी मरीजों की आवश्यक जांच की गई है और फिलहाल किसी की हालत चिंताजनक नहीं है। कुछ घायलों को निगरानी में रखा गया है, जबकि हल्की चोट वाले कुछ मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी भी दी जा सकती है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची इमारतों के निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण, मजबूत सपोर्ट सिस्टम और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना बेहद जरूरी है। यदि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की लापरवाही होती है, तो इस तरह के हादसे बड़ी दुर्घटनाओं में बदल सकते हैं।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी पहलुओं और साइट पर अपनाए गए सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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