Jharkhand News: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है. राज्य के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल सारंडा और आसपास के जंगलों में सक्रिय 27 माओवादियों ने पुलिस मुख्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया. इनमें कई ऐसे नक्सली भी शामिल हैं जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने 16 हथियार, 2857 गोलियां और कई विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा एजेंसियों को सौंपी. इस सामूहिक सरेंडर को झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे ऑपरेशन और चौतरफा दबाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं और अब उनके पास मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.
पुलिस मुख्यालय में हुआ सामूहिक आत्मसमर्पण
राजधानी रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. इस मौके पर झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई हार्डकोर उग्रवादी शामिल हैं, जो लंबे समय से सारंडा, पश्चिमी सिंहभूम, सोनुआ और आसपास के इलाकों में सक्रिय थे. इनमें से आठ नक्सलियों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने जो हथियार सौंपे, उनमें इंसास राइफल, एसएलआर, देसी हथियार, पिस्टल और बड़ी मात्रा में कारतूस शामिल हैं. पुलिस के अनुसार कुल 16 हथियार और 2857 जिंदा गोलियां जमा कराई गईं. इसके अलावा जंगलों में छिपाकर रखे गए कुछ अन्य सामान और दस्तावेजों की जानकारी भी सुरक्षाबलों को मिली है. माना जा रहा है कि इससे नक्सल नेटवर्क को और कमजोर करने में मदद मिलेगी.
सारंडा में बढ़ा सुरक्षाबलों का दबाव
आईजी ऑपरेशन नरेंद्र सिंह ने कहा कि झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों ने संयुक्त अभियान के जरिए नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि राज्य के ज्यादातर इलाकों से नक्सली नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है और अब सारंडा का इलाका ही उनका अंतिम मजबूत गढ़ बचा है. उन्होंने साफ कहा कि अब नक्सलियों के पास सिर्फ दो विकल्प हैं या तो हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट आएं या फिर सुरक्षाबलों की सख्त कार्रवाई का सामना करें.
लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन
सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमें लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. कोबरा, झारखंड जगुआर, CRPF और जिला पुलिस की टीमें आधुनिक तकनीक और ड्रोन की मदद से इलाके की निगरानी कर रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक जंगलों की स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि नक्सलियों की गतिविधियों और मूवमेंट पर नजर रखी जा सके. कई इलाकों में नए कैंप भी स्थापित किए गए हैं जिससे नक्सलियों के छिपने के रास्ते सीमित हो गए हैं.
सोनुआ इलाके में हुई मुठभेड़
आईजी ऑपरेशन ने बताया कि हाल ही में सोनुआ थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी. इस दौरान सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली जंगल की ओर भाग निकले. मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों को कई सामान बरामद हुए हैं. अधिकारियों को यह भी सूचना मिली है कि इस कार्रवाई में कुछ नक्सली घायल हुए हैं. इसके बाद से इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है.
सरकार की पुनर्वास नीति का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति का असर भी अब जमीन पर दिखाई देने लगा है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण और समाज की मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाता है. इसी वजह से कई नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी नक्सली सरेंडर कर सकते हैं.
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण
झारखंड लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है. विशेषकर सारंडा, चाईबासा और पश्चिमी सिंहभूम के घने जंगल नक्सलियों के बड़े ठिकाने माने जाते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों ने लगातार अभियान चलाकर उनकी ताकत को काफी कमजोर कर दिया है. सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क, नए पुलिस कैंप और विकास योजनाओं के कारण अब ग्रामीण इलाकों में भी सरकार की पहुंच बढ़ी है. इससे नक्सलियों की पकड़ कमजोर हुई है.
स्थानीय लोगों में बढ़ा भरोसा
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले नक्सलियों के डर से लोग खुलकर पुलिस का साथ नहीं देते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. लगातार हो रही कार्रवाई और विकास कार्यों की वजह से स्थानीय लोगों का भरोसा प्रशासन पर बढ़ा है. कई गांवों में युवाओं को रोजगार और शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है ताकि वे उग्रवाद की राह से दूर रहें.
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता
27 नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे न केवल नक्सल संगठन को झटका लगा है बल्कि जंगलों में सक्रिय अन्य उग्रवादियों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में अभियान और तेज किया जाएगा ताकि झारखंड को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जा सके.
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