Karnataka Politics: इन दिनों कर्नाटक में एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को कांग्रेस हाई कमांड ने दिल्ली बुलाया है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की बैठक के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और कैबिनेट फेरबदल को लेकर बड़े फैसले की अटकलें सामने आ सकती हैं। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के अंदर मंत्री पद और सत्ता संतुलन को लेकर दिन पर दिन चर्चा तेज होती जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने 26 मई को यानी आने वाले कल के दिन दिल्ली में अहम बैठक बुलाई है, जिसमें राज्यसभा सीटों, एमएलसी चुनावों और सरकार के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि पार्टी की तरफ से अभी तक किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है।
दिल्ली में होगी हाई कमांड से अहम बैठक
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस हाई कमांड ने उन्हें दिल्ली बुलाया है। वहीं डीके शिवकुमार ने भी संकेत दिए हैं कि अगर पार्टी नेतृत्व बुलाता है तो वह जरूर जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, दोनों नेता एक साथ दिल्ली पहुंच सकते हैं और कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर उम्मीदवारों के चयन पर चर्चा होगी, क्योंकि नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है। इसके अलावा विधान परिषद यानी MLC की नौ सीटों और कुछ विधायकों से जुड़े मामलों पर भी विचार किया जा सकता है।
फिर क्यों तेज हुई नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा?
कर्नाटक सरकार ने 20 मई को अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे किए हैं। इसके बाद से ही राज्य में सत्ता परिवर्तन की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर पुराने समझौते का मुद्दा फिर सामने आ गया है। डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर एक “पावर शेयरिंग फॉर्मूला” बना था। उनके अनुसार, समझौते के तहत कुछ समय बाद शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना था। हालांकि कांग्रेस ने कभी भी इस तरह के किसी समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
सिद्धारमैया ने दिया साफ संदेश
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार यह कहते रहे हैं कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल (Five year term) पूरा करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन जैसा कोई सवाल नहीं है। सिद्धारमैया ने कहा कि वह पार्टी हाई कमांड (Party High Command) के फैसले का सम्मान करेंगे। अगर पार्टी नेतृत्व चर्चा के लिए बुलाता है, तो वह दिल्ली जाकर बैठक में हिस्सा लेंगे। उनके बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि वह फिलहाल मुख्यमंत्री पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी मीडिया से बातचीत में संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे बुलाया जाएगा तो मैं दिल्ली जरूर जाऊंगा।’उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि वह कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का पालन करेंगे। शिवकुमार ने यह भी कहा कि भविष्य में क्या होगा, यह समय तय करेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस विधायकों में बढ़ रही बेचैनी
कांग्रेस पार्टी के भीतर अब सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन ही नहीं, बल्कि कैबिनेट फेरबदल की मांग भी जोर पकड़ रही है। कई विधायक मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं और चाहते हैं कि मंत्रिमंडल में बदलाव किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ विधायक दिल्ली जाकर पार्टी हाई कमांड से मुलाकात भी कर चुके हैं। वहीं कई अन्य विधायक इस महीने के आखिर तक फिर दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। इन नेताओं का मानना है कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो सरकार और पार्टी दोनों की छवि प्रभावित हो सकती है।

कैबिनेट फेरबदल पर अलग-अलग राय
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल के पक्ष में हैं। वह खाली पड़े मंत्री पदों को भरने और कुछ नए चेहरों को मौका देने के इच्छुक बताए जा रहे हैं।
दूसरी तरफ डीके शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर फैसला हो। इसके बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर चर्चा की जाए। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं।
कैबिनेट फेरबदल का क्या होगा असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस आलाकमान कैबिनेट (Congress High Command Cabinet) फेरबदल को मंजूरी दे देता है, तो यह संकेत होगा कि सिद्धारमैया को पूरा कार्यकाल दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। यही कारण है कि उनके समर्थक नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लगातार हवा दे रहे हैं।
तीन मंत्री पद अभी भी खाली
कर्नाटक में मुख्यमंत्री (Karnataka Chief Minister) समेत कुल 34 मंत्रियों की अनुमति है। फिलहाल सरकार में तीन मंत्री पद खाली हैं।इनमें एक पद बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ था। उन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि ST विकास निगम में कथित घोटाले के आरोप लगे थे। दूसरा पद के.एन. राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। वहीं तीसरा पद मंत्री डी. सुधाकर के निधन के कारण खाली पड़ा है। इन खाली पदों को भरने को लेकर भी पार्टी के भीतर दबाव बढ़ता जा रहा है।
2028 चुनाव पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2028 विधानसभा चुनाव माने जा रहे हैं। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि अगर नेतृत्व विवाद लंबा चला तो इसका असर सरकार की छवि और संगठन दोनों पर पड़ेगा। इसी वजह से पार्टी हाई कमांड जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकता है। फिलहाल सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हुई है।अब देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक में स्थिरता बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाता है और क्या सिद्धारमैया-शिवकुमार के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।



