Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र आज गुरुवार के दिन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। बता दें सत्र के दौरान सरकार ने दोनों सदनों से कुल 12 बिल पास हुए हैं, लेकिन लगातार हो रहे ज्यादा हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच रुकावट के वजह से संसद की उत्पादकता काफी कम रही है। ऐसे में लोकसभा की उत्पादकता महज 19% रही और राज्यसभा की 39.17% रही है। वहीं आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ एक मिनट चली है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
12 बिल हुए पास
जनाक्रारी के अनुसार, मानसून सत्र में विधायी कामकाज के लिहाज से सरकार को 12 विधेयक पास कराने में सफलता मिली है। इनमें सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण, राष्ट्रीय सम्मान, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या, MSME, टैक्सेशन, बैंकर्स बुक्स ऑफ एविडेंस, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स, केरल के नाम में बदलाव, NCDC और MMDR से जुड़े संशोधन विधेयक शामिल रहे।
बता दें सरकार ने इन विधेयकों को सत्र की बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी और हंगामे के कारण संसदीय बहस प्रभावित हुई।
लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी रही उत्पादकता
दरअसल लोकसभा के कामकाज का आंकड़ा सत्र की स्थिति को साफ तौर पर दिखाता है। ऐसे में सदन की कुल 19 बैठकें हुईं हैं। जिनमें करीब 114 घंटे का निर्धारित समय था, लेकिन लोकसभा में केवल 17 घंटे 30 मिनट ही कामकाज हो सका।
इस तरह करीब 96 घंटे 30 मिनट का समय हंगामे और अन्य कारणों से काम नहीं हो सका। लोकसभा की कुल उत्पादकता सिर्फ 19 फीसदी रही। सत्र के आखिरी दिन स्थिति और भी खराब रही, जब लोकसभा की कार्यवाही महज एक मिनट में ही समाप्त हो गई।
राज्यसभा में भी कामकाज प्रभावित
राज्यसभा में भी लगातार हंगामा देखने को मिला है। जिससे सदन की उत्पादकता 39.17 फीसदी रही है। सदस्यों के पास सवाल पूछने, शून्यकाल और खास उल्लेख के जरिए अलग-अलग मुद्दे उठाने के कई मौके थे, लेकिन बड़ी संख्या में प्रस्ताव सदन में नहीं उठाए जा सके।
आंकड़ों के मुताबिक, सदस्यों के पास 285 सवाल, 380 शून्यकाल प्रस्ताव और 380 विशेष उल्लेख का मौका था। इनमें से केवल 16 सवाल, 52 शून्यकाल प्रस्ताव और 93 विशेष उल्लेख ही सदन में उठाए जा सके।
छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव छात्रों के प्रदर्शन को लेकर रहा है। बता दें जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा संसद के अंदर भी उठा है। जिसमें सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर चर्चा की पेशकश की। हालांकि, विपक्ष ने सरकार की पेशकश को स्वीकार नहीं किया, लेकिन विपक्ष की ओर से सवाल उठाया गया कि छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर सरकार को पहले जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद यह मामला संसद के भीतर लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना रहा।
मकर द्वार पर आमने-सामने आए सांसद
11 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक तनाव संसद परिसर तक पहुंच गया था। जिसमें संसद के मकर द्वार के पास NDA और इंडिया गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए थे। स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा कर्मियों को बीच में आना पड़ा। वहीं इस घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए। सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बचने का आरोप लगाया।

सरकार ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सत्तापक्ष ने कांग्रेस और विपक्षी सांसदों के रवैये पर भी सवाल उठाए। जिसमें सरकार की ओर से कहा गया कि वह चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय हंगामा किया।
सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि सदन में नारेबाजी, पोस्टर और कार्ड दिखाने के कारण महत्वपूर्ण विधायी काम प्रभावित हुआ। सरकार की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि अगर नए सांसदों को सदन में चर्चा और बहस का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा, तो वे संसदीय कार्यप्रणाली कैसे सीखेंगे।
विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब
दरअसल इस मामले को लेकर विपक्ष का कहना है की सरकार को पहले उन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जिन्हें लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। जिससे विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन, कथित कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। जिसमें सबसे बड़ी यही वजह रही कि कई मौकों पर सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा और पीठासीन अधिकारियों को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
खड़गे ने भी उठाया मुद्दा
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया। इस पर भी सदन में राजनीतिक माहौल गरम रहा। वहीं, राज्यसभा में MMDR संशोधन विधेयक पारित होने के बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।
आखिर सत्र का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है?
जानकारी के अनुसार, कुल मिलाकर मानसून सत्र का रिकॉर्ड दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रखता है। जिसमें एक तरफ सरकार ने 12 बिल पास कराकर अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया। दूसरी तरफ, सदन की कम उत्पादकता और लगातार हंगामे ने संसदीय बहस पर सवाल खड़े किए।
लोकसभा में 19% और राज्यसभा में 39.17% उत्पादकता रही। लोकसभा में निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा कामकाज के बिना गुजर गया। जिसमें आखिरी दिन सदन की कार्यवाही का सिर्फ एक मिनट चलना भी सत्र के दौरान बने गतिरोध को दर्शाता है।
ऐसे में मानसून सत्र भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा, जवाबदेही और राजनीतिक मुद्दों को लेकर टकराव अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। अब निगाहें अगले संसदीय सत्र पर रहेंगी कि क्या सरकार और विपक्ष किसी साझा रास्ते पर पहुंचकर सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बना पाते हैं।



