Karnataka SIR Controversy: कर्नाटक में वोट लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। दरअसल राज्य में चल रही मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्या
रोप तेज हो गए हैं। वहीं इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) से मुलाकात कर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई।
जानकारी के लिए बता दें प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने किया। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि जहां भी नियमों का उल्लंघन हुआ है, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
आखिर क्या है SIR प्रक्रिया?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करना होता है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं।
सत्यापन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति उसी पते पर रहता है, वह जीवित है और मतदाता सूची में दर्ज जानकारी सही है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक घर पर कम से कम तीन बार जाकर सत्यापन किया जाना चाहिए।
BJP-JDS ने लगाए क्या आरोप?
बता दें की चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के कई इलाकों में SIR प्रक्रिया आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार नहीं चलाई जा रही है। ऐसे में उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं के घरों और धार्मिक पदाधिकारियों के माध्यम से फॉर्म भरवा रहे हैं।
BJP का कहना है कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। पार्टी के अनुसार SIR का उद्देश्य व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक मतदाता का सत्यापन करना है, न कि किसी एक स्थान पर बड़ी संख्या में फॉर्म भरना।
घर-घर सत्यापन नहीं होने का आरोप
भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक बूथ लेवल ऑफिसर को संबंधित मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन करना होगा। यदि कोई व्यक्ति पहली बार नहीं मिलता है तो कम से कम तीन बार प्रयास किया जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि कई क्षेत्रों में इन नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक ही स्थान पर लोगों को बुलाकर दस्तावेज जमा कराए गए। BJP के अनुसार इससे वास्तविक सत्यापन का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
सरकारी योजनाओं को लेकर भी उठाया सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा रखा। BJP का दावा है कि कुछ स्थानों पर लोगों से कहा जा रहा है कि यदि उनका नाम मतदाता सूची से हट गया तो वे सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पाएंगे।
पार्टी ने इसे गलत जानकारी बताते हुए कहा कि इस तरह के संदेश लोगों में भ्रम और डर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से ऐसे मामलों की जांच कराने की मांग की है।
पारिवारिक जानकारी मांगने पर भी आपत्ति
BJP-JDS प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मतदाताओं से पिता, माता, दादा या दादी जैसी पारिवारिक जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी जा रही है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइंस में ऐसी जानकारी को अनिवार्य नहीं बताया गया है। यदि कहीं इस प्रकार की अतिरिक्त जानकारी ली जा रही है तो यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
प्रल्हाद जोशी ने आरोप लगाया कि जब कुछ लोगों ने अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने या प्रक्रिया पर सवाल उठाए तो उन्हें कथित तौर पर धमकी भरे जवाब मिले। जिसमें उन्होंने दावा किया कि शिकायत करने वालों से कहा गया कि वे जहां चाहें शिकायत कर सकते हैं और किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव आयोग की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चुनाव आयोग से BJP-JDS की दो बड़ी मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने दो मुख्य मांगें रखीं-
- जिन बूथ लेवल ऑफिसरों ने घर-घर सत्यापन करने के बजाय एक ही स्थान पर SIR प्रक्रिया पूरी की है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।
- जिन क्षेत्रों में अनियमितताओं के ठोस प्रमाण मिले हैं, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए।
चुनाव आयोग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता सूची में केवल पात्र और वास्तविक मतदाता ही शामिल रहें। यदि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा होता है तो इससे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए चुनाव आयोग आमतौर पर ऐसी शिकायतों की जांच कर आवश्यक कदम उठाता है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर BJP-JDS प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है।
ऐसे में अब सभी की नजर चुनाव आयोग पर है कि वह इन शिकायतों की जांच के बाद क्या फैसला लेता है। यदि आयोग को कहीं नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संभव है। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो आयोग प्रक्रिया को जारी रख सकता है।



