MV Golden Leo Missile Attack: यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए एक कार्गो जहाज पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है की इस हमले में एक अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने घटना की पुष्टि करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
जानकारी के लिए बता दें यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर काला सागर क्षेत्र में तेज होता दिखाई दे रहा है। वहीं इस संघर्ष का असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नागरिक जहाज भी इसकी चपेट में आने लगे हैं।
ओडेसा बंदरगाह से निकलते ही हुआ हमला
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 19 जुलाई 2026 को MV Golden Leo नाम का कार्गो जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर रवाना हुआ था। जहाज समुद्र में आगे बढ़ ही रहा था कि उस पर मिसाइलों से हमला कर दिया गया।
यूक्रेन ने इस हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि रूस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हमले के समय जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें पांच भारतीय नागरिक भी शामिल थे। हादसे में चार भारतीयों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया।
भारत सरकार ने जताया दुख
दरअसल विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यूक्रेन में मौजूद भारतीय मिशन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जिससे भारतीय अधिकारियों द्वारा स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में रहकर प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
ऐसे में सरकार का कहना है कि वह मृत भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ खड़ी है और घायल भारतीय को हर जरूरी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
व्यावसायिक जहाजों पर हमला निंदनीय
भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी व्यावसायिक जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ है। ऐसे हमलों से निर्दोष क्रू सदस्यों की जान खतरे में पड़ती है और वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित होता है।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत चल रहा था जहाज
विदेश मंत्रालय के अनुसार, MV Golden Leo पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत संचालित हो रहा था। यह जहाज यूक्रेन से अनाज लेकर दूसरे देशों की ओर जा रहा था। काला सागर से अनाज की सप्लाई दुनिया के कई देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस तरह का हमला वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।
केरल के युवक की भी गई जान
मृत भारतीयों में केरल के कासरगोड जिले के रहने वाले 26 वर्षीय अखिल जोयन भी शामिल हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी की ओर से ईमेल के जरिए हादसे और अखिल की मौत की सूचना दी गई। घटना की खबर मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अन्य मृत भारतीयों की पहचान और उनके गृह राज्यों की जानकारी फिलहाल आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।
तीन क्रूज मिसाइलों से किया गया हमला
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, कार्गो जहाज पर तीन क्रूज मिसाइलें दागी गईं। मिसाइलें जहाज से टकराने के बाद उसमें भीषण आग लग गई।
यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। कई घंटों तक चले अभियान में कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि कई लोग जहाज में फंस गए थे।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, घटना के बाद समुद्र में एक जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में Golden Leo के रूप में हुई।
कई देशों के नागरिक थे सवार
बता दें की जहाज पर केवल भारतीय ही नहीं बल्कि सीरिया समेत अन्य देशों के नागरिक भी क्रू सदस्य के रूप में मौजूद थे।
यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार, इस हमले में कुल नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हुई। वहीं, कई अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में किया जा रहा है।
मुंबई की कंपनी से जुड़ा है जहाज
शिपिंग डेटा उपलब्ध कराने वाली संस्था LSEG के अनुसार, MV Golden Leo का स्वामित्व मुंबई स्थित Ocean Grace Shipping Limited के पास है। वहीं, जहाज का संचालन Friends Shipping Company SA द्वारा किया जा रहा था।
घटना के बाद कंपनी ने भी प्रभावित परिवारों से संपर्क शुरू कर दिया है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहयोग कर रही है।
काला सागर फिर बना संघर्ष का केंद्र
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए युद्ध के बाद काला सागर लगातार तनाव का केंद्र बना हुआ है। इस समुद्री क्षेत्र से दुनिया के कई देशों को गेहूं, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है। युद्ध के कारण कई बार अनाज निर्यात प्रभावित हुआ है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के जरिए कुछ समय के लिए अनाज निर्यात समझौते हुए थे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बढ़ते हमलों ने फिर से समुद्री व्यापार को खतरे में डाल दिया है।
समुद्री व्यापार पर बढ़ा खतरा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह के हमले लगातार जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां काला सागर के मार्ग का इस्तेमाल कम कर सकती हैं। इससे न केवल वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि खाद्यान्न की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। कई बीमा कंपनियां पहले ही युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में जहाज भेजने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम वसूल रही हैं।
भारत की चिंता बढ़ी
इस घटना ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। दुनिया भर के व्यापारी जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और वे वैश्विक समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस मामले में सभी आवश्यक कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।



