NEP 2020 New Rules: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल (Emergency) पर एक विशेष खंड शामिल किया है। नई किताब ‘Understanding Society: India and Beyond’ में भारतीय लोकतंत्र की यात्रा, उसकी उपलब्धियों और चुनौतियों के साथ-साथ आपातकाल के दौर को विस्तार से समझाया गया है। NCERT के इस फैसले को स्कूल शिक्षा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब कक्षा 9 के छात्र लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के साथ-साथ देश के उस दौर के बारे में भी पढ़ेंगे, जिसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।
पहली बार कक्षा 9 की किताब में शामिल हुआ इमरजेंसी का अध्याय
NCERT के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अलग से सामग्री जोड़ी गई है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के तहत तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम का हिस्सा है। नई किताब में लोकतंत्र की मजबूती और उसके सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए इमरजेंसी को एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
क्या पढ़ेंगे छात्र?
नई पुस्तक में बताया गया है कि 1975 में तत्कालीन सरकार ने “आंतरिक अशांति” के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था। किताब के अनुसार इस अवधि में देश के अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी और कई राजनीतिक नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि इस दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं पर व्यापक दबाव पड़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं पर असर देखने को मिला।
लोकतंत्र की चुनौतियों को समझाने का प्रयास
NCERT ने इस विषय को केवल ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की चुनौतियों के संदर्भ में शामिल किया है। पुस्तक में छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं होता, बल्कि नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र मीडिया और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती भी उसकी आधारशिला होती है। इमरजेंसी को इसी व्यापक संदर्भ में पढ़ाया जाएगा।
जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी उल्लेख
नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन आंदोलन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। किताब में बताया गया है कि बिहार और गुजरात सहित कई राज्यों में छात्रों और आम नागरिकों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन किए। इसके बाद 1977 में आपातकाल समाप्त हुआ और आम चुनाव कराए गए, जिसमें मतदाताओं ने अपने मतदान के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाई। पुस्तक इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण बताती है।
केवल इमरजेंसी ही नहीं, अन्य चुनौतियां भी शामिल
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में केवल इमरजेंसी पर ही चर्चा नहीं की गई है। लोकतंत्र के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों जैसे:
- फेक न्यूज़
- गलत सूचना (Misinformation)
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान
- नियमों की अनदेखी
- गरीबी
- क्षेत्रवाद
- सामाजिक भेदभाव
- लैंगिक असमानता
जैसे विषयों को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को लोकतंत्र की समकालीन चुनौतियों से भी परिचित कराना है।
NEP 2020 के अनुरूप तैयार हुआ नया पाठ्यक्रम
नई शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य रटने की बजाय समझ आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसी सोच के तहत नई NCERT पुस्तकों में विषयों को आपस में जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया है। सामाजिक विज्ञान की चार अलग-अलग शाखाओं इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र, को एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों में विषयों की बेहतर समझ विकसित होगी।
क्यों अहम माना जा रहा है यह बदलाव?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे छात्र केवल घटनाओं को याद नहीं करेंगे बल्कि उनके कारण, प्रभाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को भी समझ पाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि संवैधानिक मूल्यों, नागरिक जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझाने के लिए ऐसे ऐतिहासिक उदाहरण उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि इस बदलाव को लेकर राजनीतिक और अकादमिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, क्योंकि आपातकाल भारतीय राजनीति का संवेदनशील विषय रहा है।
नई किताबों में और क्या बदला?
नई NCERT सामाजिक विज्ञान पुस्तक में कई संरचनात्मक बदलाव भी किए गए हैं। अब विषयों को अलग-अलग किताबों में बांटने के बजाय एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। वास्तविक जीवन के उदाहरण, गतिविधि आधारित शिक्षण और विश्लेषणात्मक प्रश्नों पर अधिक जोर दिया गया है। नई किताबें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार की गई हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई पुस्तकों से छात्रों में आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking), संवैधानिक समझ और सामाजिक जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और नागरिकों की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। शिक्षकों के लिए भी नई पुस्तकों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि नए पाठ्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
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