Nepal Flood News: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड (Nepal Flash Flood 2026) ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और तेज जलप्रवाह के वजह से अब तक 270 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी है। जिसमें राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर है। ऐसे में आइए जानते यहां खबर को लेकर पूरी जानकारी
270 शव बरामद, सैकड़ों लोग अब भी लापता
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। जिससे स्थानीय पुलिस का कहना है कि अब तक 270 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। बाढ़ का पानी अचानक बढ़ने से कई लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इस आपदा में कई वाहन तेज बहाव में बह गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं। इससे कई इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों और दूसरे क्षेत्रों से टूट गया है। 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
288 भारतीय नागरिक लापता
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल में आई बाढ़ के कारण 288 भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं। हालांकि, स्थिति तेजी से बदल रही है और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई लोगों के सुरक्षित मिलने की जानकारी भी सामने आ रही है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय नागरिक नेपाल से आगे चीन की तरफ भी हो सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार करीब 200 भारतीय अभी चीन की तरफ फंसे होने की संभावना है। ऐसे में लापता भारतीयों की सही संख्या और लोकेशन को लेकर लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।

21 तमिलनाडु के नागरिकों का रेस्क्यू
बाढ़ के बीच राहत की खबर भी सामने आई है। तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे और बाढ़ के बाद वहां फंस गए थे। बचाव अभियान के दौरान इन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके अलावा हैदराबाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 31 यात्रियों के भी सुरक्षित होने की जानकारी है। ये यात्री नेपाल-तिब्बत सीमा के पास फ्लैश फ्लड आने से कुछ घंटे पहले प्रभावित क्षेत्र से निकल गए थे। इस समूह में पूर्व DRDO चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी भी शामिल थे।
100 भारतीय पर्यटकों और 25 चीनी नागरिकों का पता चला
नेपाल में राहत अभियान के दौरान करीब 100 लापता भारतीय पर्यटकों का पता लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके साथ ही 25 चीनी नागरिकों के सुरक्षित होने की खबर है। इससे प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार रसुवा जिले में 517 विदेशी पर्यटकों से संपर्क टूट गया था। इनमें 178 भारतीय पर्यटक शामिल बताए गए हैं। भारत के बाद अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के कई पर्यटक भी प्रभावित क्षेत्र में फंसे बताए गए हैं।
यूपी-बिहार में भी बढ़ी सतर्कता
नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में गंडक, नारायणी और कोसी जैसी नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बिहार के छह जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और संभावित जलप्रवाह पर बनी हुई है।
NDRF के मुताबिक नेपाल की फ्लैश फ्लड का यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में अब तक कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। दोनों राज्यों के साथ समन्वय कर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। बिहार में NDRF की 9 टीमें और उत्तर प्रदेश में 11 टीमें तैनात हैं।
पीएम मोदी ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत सरकार ने भी मदद का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारत और नेपाल की एजेंसियां लगातार संपर्क में हैं और लापता लोगों की तलाश तथा राहत-बचाव अभियान पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। वहीं भारत में भी यूपी और बिहार के सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
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