Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा हफ्ता भी विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ गया। बताया जा रहा है की आज शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जिसमें लगातार हंगामे के वजह से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और दोनों सदनों को सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार लोकसभा में शुक्रवार को भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी और नीट पेपर लीक को लेकर कई मुद्दे उठाए। जिसके बाद विपक्ष सरकार से इन मामलों पर जवाब और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। ऐसे में हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी पूरा नहीं हो सका। इससे संसद के विधायी कामकाज के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित हुई।
पांचवें दिन भी नहीं चला लोकसभा का काम
मॉनसून सत्र के तीसरे सप्ताह में लगातार पांचवें दिन लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण प्रभावित रही। जिसमें विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे और अपनी मांगों को लेकर सदन में आवाज उठाते रहे। जिसके वजह से स्थिति सामान्य नहीं होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है।
ओम बिरला ने सदन में बार-बार हंगामा किए जाने पर नाराजगी जताई। जिसमें उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को लगातार बाधित करना संसदीय और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि सांसदों को जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए मिले अवसर का इस्तेमाल करना चाहिए।
राज्यसभा में भी स्थिति अलग नहीं रही। विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के कारण उच्च सदन की कार्यवाही भी आगे नहीं बढ़ सकी। अंत में राज्यसभा को भी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक चलना प्रस्तावित है।
विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है?
विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया हुआ है। इनमें प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, धार्मिक स्थलों से जुड़े चढ़ावे की चोरी और नीट पेपर लीक जैसे मामले शामिल हैं। जिसमें विपक्ष का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों पर सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। साथ ही विपक्षी दल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बयान की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी सांसदों के लगातार विरोध के चलते प्रश्नकाल प्रभावित हुआ। संसद में प्रश्नकाल को सरकार से जवाब मांगने और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में इसका पूरा न हो पाना विपक्ष और सरकार के बीच टकराव को और बढ़ाता नजर आया।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के हंगामे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जिसमें -उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा का समय कम होने के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है। उनके मुताबिक विपक्ष लगातार नारेबाजी और हंगामा कर रहा है, जिसके कारण चर्चा प्रभावित हो रही है। साथ ही रिजिजू ने यह भी कहा कि यह कहना सही नहीं है कि संसद में कोई काम नहीं हो रहा। उनके अनुसार सदन में कई विधेयक पारित किए गए हैं और जरूरी संसदीय काम भी हुआ है, लेकिन हंगामे के कारण चर्चा के लिए मिलने वाला समय प्रभावित हुआ है।
अमित शाह के बयान को लेकर विपक्ष की मांग पर रिजिजू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में मौजूद रहते हैं और सदन में किस मंत्री को कब और कितनी देर बोलना है, इसका फैसला संसदीय प्रक्रिया के तहत होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बात का फैसला नहीं कर सकता कि कौन मंत्री कब सदन में बोलेगा।
रिजिजू ने कहा कि जब गृह मंत्री सदन में अपना बयान देंगे, तब विपक्ष को सदन में रहकर उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के सदन से बाहर जाने की स्थिति में माफी मांगने की बात भी कही।
संसद परिसर में भी बैठकों का दौर
सदन के अंदर जहां हंगामा जारी रहा, वहीं संसद परिसर में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहीं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अमित शाह से चर्चा की है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने संसद पहुंचे। वहीं शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। बादल ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर का बयान
संसद में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा का माहौल खत्म नहीं होता, तब तक दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं हो सकते। साथ ही जयशंकर ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को अपनी नीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया।
ऐसे में विदेश मंत्री का कहना है की भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित किया, अटारी चेक पोस्ट बंद की, वीजा संबंधी प्रतिबंध लगाए और दोनों देशों के राजनयिक मिशनों की संख्या कम की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। हालांकि जयशंकर ने कहा कि तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच कुछ सीमित संपर्क अभी भी जारी हैं। इनमें डीजीएमओ स्तर की बातचीत, मिसाइल परीक्षण की पूर्व सूचना, परमाणु प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान और कैदियों से संबंधित राजनयिक संपर्क शामिल हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत सीमा पार आतंकवाद का जवाब देता रहेगा और देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पीएम मोदी ने NDA सांसदों से की मुलाकात
जानकारी के लिए बता दें इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में नाश्ते के दौरान एनडीए के करीब 45 सांसदों से मुलाकात की। इस बैठक में एनसीपी के अजित पवार गुट और शिवसेना के शिंदे गुट समेत एनडीए के कई सांसद मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री ने सांसदों से संसद की बहस में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने की अपील की है। जिसमें उन्होंने सांसदों को संसदीय इतिहास पढ़ने और संसद से जुड़ी उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। जिसके बाद सांसदों से अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों पर ध्यान देने को कहा। जिसमें उन्होंने कहा कि किसी परियोजना में समस्या आने पर सांसद सीधे पीएमओ से संपर्क कर सकते हैं।
सांसदों से उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी भी ली। जिसमें उन्होंने सांसदों को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और किसानों, मजदूरों तथा गरीबों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि एनडीए (NDA) के लिए हर सांसद और हर सहयोगी दल महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसद में बार-बार हो रहे हंगामे पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे नए सांसदों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
सोमवार को क्या होगा?
ऐसे में अब लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को दोबारा शुरू होगी। ऐसे में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है। विपक्ष अपने मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का आरोप है कि विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में चर्चा का समय बर्बाद हो रहा है।
मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक प्रस्तावित है। ऐसे में बचे हुए दिनों में संसद का कामकाज सुचारु रूप से चलता है या एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।



