Piyush Goyal Canada Visit: भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal तीन दिवसीय कनाडा दौरे पर रवाना हो रहे हैं. माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और कई देश नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश में जुटे हैं. भारत और कनाडा भी अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाकर आने वाले वर्षों में व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहते हैं.
2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. दोनों देशों के बीच कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर CEPA समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है तो दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा फायदा मिल सकता है. इससे व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश को नई गति मिलेगी.
CEPA समझौता क्यों है खास?
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA भारत और कनाडा के बीच एक ऐसा ट्रेड एग्रीमेंट होगा जो दोनों देशों को व्यापारिक रियायतें देगा. इसके तहत कई उत्पादों पर टैक्स कम किए जा सकते हैं और बाजार तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है. यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं होगा, बल्कि सेवाओं, निवेश, तकनीक, डिजिटल व्यापार और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों को भी कवर कर सकता है. भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों को उत्तरी अमेरिका के बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है.
ऊर्जा और परमाणु सहयोग पर रहेगा फोकस
भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए साझेदारों की तलाश कर रहा है. दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु सहयोग भी तेजी से बढ़ रहा है. कनाडा यूरेनियम आपूर्ति के क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच कनाडा भारत के लिए ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति का भरोसेमंद विकल्प बन सकता है.
कृषि और खाद्य क्षेत्र में बड़ा अवसर
भारत और कनाडा के बीच कृषि व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कनाडा से बड़ी मात्रा में पीली मटर और मसूर दाल का आयात किया. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी तकनीक और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं. भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यापार समझौता लागू होता है तो भारतीय कृषि उत्पादों को कनाडा में बेहतर बाजार मिल सकता है.
भारतीय उद्योगों को क्या होगा फायदा?
प्रस्तावित ट्रेड डील से भारत के कई उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर फार्मास्यूटिकल्स, ऑर्गेनिक केमिकल, इलेक्ट्रिकल उपकरण, टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण और स्टील सेक्टर के लिए नए अवसर खुल सकते हैं. भारतीय निर्यातकों को कनाडा के बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होगी. इससे छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSME सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है. सरकार का मानना है कि इससे “मेक इन इंडिया” और निर्यात बढ़ाने की रणनीति को मजबूती मिलेगी.
शिक्षा और स्किल सेक्टर में भी सहयोग
Canada भारतीय छात्रों के लिए सबसे लोकप्रिय देशों में से एक बन चुका है. हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कनाडा में उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं. अब दोनों देश शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं. माना जा रहा है कि पीयूष गोयल के दौरे में इस विषय पर भी चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीकी शिक्षा और इनोवेशन सेक्टर में साझेदारी दोनों देशों के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है.
बदलते वैश्विक माहौल में अहम दौरा
दुनिया इस समय आर्थिक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन संकट का सामना कर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक महंगाई ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. ऐसे में भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक और आर्थिक रूप से मजबूत देशों के बीच सहयोग को काफी अहम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी वैश्विक व्यापार संतुलन में भी सकारात्मक भूमिका निभा सकती है.
भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत?
पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे. हालांकि अब दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं. पीयूष गोयल का यह दौरा दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. कनाडा की मार्क कार्नी सरकार भी भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को विस्तार देने की इच्छुक दिखाई दे रही है.
निवेश बढ़ाने पर जोर
Canada की कई कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं. वहीं भारतीय कंपनियां भी कनाडा में आईटी, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर CEPA समझौता आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह में तेजी आ सकती है. भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़ा उपभोक्ता बाजार कनाडाई कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
MSME सेक्टर को मिलेगी मजबूती
भारत सरकार खासतौर पर MSME सेक्टर को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर फोकस कर रही है. कनाडा के साथ प्रस्तावित समझौता छोटे उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है. व्यापार प्रक्रियाएं आसान होने से भारतीय MSME कंपनियों को निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही तकनीक और इनोवेशन आधारित क्षेत्रों में भी सहयोग मजबूत हो सकता है.
दोनों देशों के लिए क्यों जरूरी है यह साझेदारी?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि कनाडा प्राकृतिक संसाधनों और तकनीकी क्षमता के लिए जाना जाता है. ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत-कनाडा आर्थिक रिश्ते इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक साझेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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