New Education Minister: केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में शनिवार को बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, आज ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया और फिर उसके बाद कुछ ही घंटों में वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त कर दिया है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बरकरार रहेगी। ऐसे में वह वर्तमान में अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) का कामकाज भी संभालेंगे।
बता दें कि राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया गया, इसके बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा विवाद, पेपर लीक (Paper leak) के आरोप और छात्रों के आंदोलन को लेकर देशभर में लगातार चर्चा हो रही थी।
NEET विवाद के बाद बढ़ा सरकार पर दबाव
देखा जाए तो यह पूरा मामला 3 मई 2026 को शुरू हुआ था। NEET-UG परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आए है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे देशव्यापी छात्र आंदोलन (Nationwide Student Movement) में बदल गया।
वहीं, देश भर के छात्र संगठनों ने परीक्षा दोबारा कराने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाई है। इस मुद्दे ने देखते ही देखते राजनीतिक मोड़ ले लिया और विपक्ष ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार (Central Government) को लगातार घेरा और कई तरह के गंभीर आरोप भी लगाए है।
CJI की टिप्पणी भी बनी चर्चा का विषय
NEET विवाद के बीच 15 मई 2026 को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के लिए ‘कॉकरोच’ (Cockroach) शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
वहीं, बाद में CJI ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी टिप्पणी आम छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी उन लोगों के संदर्भ में थी, जो फर्जी डिग्री (Fake Degree) और गलत तरीकों से पेशे में प्रवेश करते हैं। इसके बाद विवाद कुछ हद तक शांत हुआ, लेकिन परीक्षा व्यवस्था पर सवाल लगातार बने रहे।
सोनम वांगचुक के जुड़ने से आंदोलन को मिली नई ताकत
NEET मामले को लेकर चल रहे आंदोलन में 28 जून 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) भी शामिल हो गए। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक मामलों (Paper Leak Cases) की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इसके बाद में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
वहीं, 20 जुलाई 2026 को CJP ने जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से संसद तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। इस घटना के बाद मामला फिर से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। इसके बाद विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा। 22 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास (Pradhanmantri Awas) के बाहर प्रदर्शन करते हुए परीक्षा घोटाले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
देशभर में लगातार बढ़ते विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच 25 जुलाई 2026 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। सरकार ने उसी दिन उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को देने का फैसला किया।
सरकार के इस फैसले के बाद CJP ने भी अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। हालांकि, छात्रों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार जरूरी हैं।
प्रह्लाद जोशी के सामने बड़ी जिम्मेदारी
प्रह्लाद जोशी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती देशभर के छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने की होगी। पिछले कुछ महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Examinations) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। ऐसे में नई शिक्षा व्यवस्था (Education System) को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है। दरअसल, परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और समयबद्ध जांच जैसे कदम उठाना बेहद जरूरी होगा। इसके अलावा छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल करना भी नए शिक्षा मंत्री के लिए आसान नहीं होगा।
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