Saharanpur Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। जानकारी के लिए बता दें की हर साल लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर सहारनपुर के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने खास अभियान चलाया है। जिससे कांवड़ मार्ग पर स्थित लगभग 150 होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट पर विभाग की ओर से QR कोड और निर्धारित रेट लिस्ट लगाई गई है, ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
150 ढाबों पर लगाए गए QR कोड
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार कांवड़ मार्ग पर आने वाले सभी प्रमुख ढाबों और भोजनालयों पर ‘फूड सेफ्टी ऐप’ से जुड़े QR कोड लगाए गए हैं। बता दें की इन QR कोड को स्कैन करते ही किसी भी श्रद्धालु को संबंधित होटल या ढाबे की पूरी जानकारी मिल जाएगी। QR कोड के जरिए यात्रियों को यह जानकारी मिलेगी—
- ढाबा संचालक का नाम
- खाद्य लाइसेंस नंबर
- लाइसेंस की वैधता
- विभागीय पंजीकरण की जानकारी
- शिकायत दर्ज करने का विकल्प
रेट लिस्ट लगाना हुआ अनिवार्य
प्रशासन ने सभी होटल और ढाबा संचालकों को आदेश दिया है कि वे अपने प्रतिष्ठान के बाहर स्पष्ट रूप से रेट लिस्ट प्रदर्शित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कांवड़ यात्रियों से कोई भी दुकानदार मनमाना शुल्क न वसूले।
खाद्य विभाग की टीम समय-समय पर निरीक्षण करेगी और यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जाती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नॉनवेज की बिक्री पूरी तरह बंद
कांवड़ यात्रा की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरे कांवड़ मार्ग पर अंडा, मांस और मछली की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सभी ढाबा संचालकों को यह भी कहा गया है कि भोजन तैयार करते समय लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करें। श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए सात्विक भोजन ही उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वच्छता पर रहेगा खास जोर
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार निरीक्षण करेंगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई, पानी की शुद्धता और खाद्य पदार्थों के रखरखाव की नियमित जांच करें। ऐसे में यदि किसी होटल या ढाबे में गंदगी, मिलावट या खराब गुणवत्ता का भोजन मिलता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त डॉ. चमन पाल ने बताया कि सभी संचालकों को पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई होटल या ढाबा संचालक विभाग के नियमों का पालन नहीं करता है, निर्धारित रेट से अधिक कीमत वसूलता है या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है।
श्रद्धालुओं को मिलेगी शिकायत करने की सुविधा
नई व्यवस्था के तहत अब श्रद्धालुओं को किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। QR कोड स्कैन करके वे सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
इस डिजिटल व्यवस्था से शिकायतों का त्वरित निस्तारण भी संभव होगा और विभाग को वास्तविक समय में जानकारी मिल सकेगी कि किस स्थान पर क्या समस्या है।
ढाबा संचालकों ने किया प्रशासन के फैसले का स्वागत
अंबाला रोड स्थित लक्ष्मी ढाबा के संचालक धर्म सिंह का कहना है कि उनके ढाबे पर विभाग द्वारा जारी रेट लिस्ट और QR कोड पहले ही लगा दिए गए हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि हर साल लाखों शिवभक्त उनके ढाबे पर भोजन करते हैं। उनकी सेवा करना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और श्रद्धालुओं को तय कीमत पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की संख्या
दरअसल हर वर्ष सावन माह में लाखों कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर विभिन्न राज्यों की ओर जाते हैं। सहारनपुर इस यात्रा का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भोजन और विश्राम के लिए रुकते हैं।
यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देता है। इस बार QR कोड व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
डिजिटल निगरानी से मिलेगी पारदर्शिता
एक्सपर्ट्स का मानना है कि QR कोड आधारित व्यवस्था से न केवल श्रद्धालुओं को सही जानकारी मिलेगी बल्कि होटल और ढाबा संचालकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे फर्जी लाइसेंस, अधिक कीमत वसूलने और खराब गुणवत्ता वाले भोजन जैसी शिकायतों में कमी आने की संभावना है। साथ ही विभाग भी डिजिटल माध्यम से सभी प्रतिष्ठानों की निगरानी कर सकेगा।



