Rahul Gandhi Dehradun News: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज शुक्रवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, सरकारी नौकरियों, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। जिसमें राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था आज गंभीर संकट से गुजर रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले हैं।
जानकारी के लिए बता दें राहुल गांधी का कहना है कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को सुनने और उनके भविष्य पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल युवाओं के भविष्य का है और इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
‘पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित’
संबोधन में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में लगातार होने वाले पेपर लीक ने लाखों नहीं बल्कि करोड़ों छात्रों के सपनों को प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 152 पेपर लीक की घटनाओं से करीब 7.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र सालों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने या पेपर लीक होने से उनका समय, पैसा और मेहनत सब बेकार हो जाती है।
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा तभी लौटेगा जब पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
‘1 प्रतिशत लोगों की वजह से 99 प्रतिशत छात्र परेशान’
राहुल गांधी ने कहा कि देश में कुछ प्रभावशाली लोग पैसे और पहुंच के दम पर परीक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल 1% लोग पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल होते हैं, लेकिन इसका नुकसान 99% ईमानदार छात्रों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के पास संसाधन नहीं हैं, वे वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में जब परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है तो उनका आत्मविश्वास भी टूटता है।
‘पेपर लीक के लिए मेन्यू कार्ड जैसी स्थिति’
दरअसल कार्यक्रम में राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में पेपर लीक की समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि अब अलग-अलग परीक्षाओं के लिए “मेन्यू कार्ड” जैसी स्थिति बन गई है। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी के पास करोड़ों रुपये हों तो वह अपनी पसंद की परीक्षा का पेपर हासिल कर सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत है।
‘दोषियों को अब तक नहीं मिली सजा’
कांग्रेस नेता ने कहा कि लगातार पेपर लीक के मामले सामने आने के बावजूद अब तक किसी भी बड़े दोषी को कड़ी सजा नहीं मिली है। जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को न्याय तभी मिलेगा जब जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम करें और दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिया जाए।
NTA और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और विश्वविद्यालयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों को किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए।
परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करना चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे। उन्होंने कहा कि यदि संस्थाएं निष्पक्ष रहेंगी तो परीक्षाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
‘युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते सीमित हो गए हैं’
राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के सामने रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले युवाओं के पास रोजगार के कई विकल्प होते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उनके अनुसार—
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले जितना मजबूत नहीं रहा।
- छोटे कारोबार शुरू करने के लिए आसानी से बैंक लोन नहीं मिलते।
- आईटी सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर दिखाई देने लगा है।
- सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण बढ़ने से सरकारी नौकरियों के अवसर भी सीमित हो रहे हैं।
‘9 करोड़ तैयारी करते हैं, नौकरी केवल 6 लाख को’
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में करीब 9 करोड़ युवा सरकारी नौकरी पाने की तैयारी करते हैं, लेकिन उनमें से केवल करीब 6 लाख युवाओं को ही नौकरी मिल पाती है। जिसमें उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की संभावना पहले ही कम होती है। ऐसे में यदि इसके बाद भी पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो छात्रों की परेशानी और बढ़ जाती है।
NEET अभ्यर्थी रिया थापा के पिता ने सुनाई अपनी पीड़ा
कार्यक्रम के दौरान हाल ही में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाली NEET अभ्यर्थी रिया थापा के पिता भी मंच पर पहुंचे। उन्होंने भावुक होकर अपनी बेटी की कहानी साझा की है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि उनकी बेटी परीक्षा व्यवस्था से बेहद निराश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला और सरकार की ओर से किसी ने हालचाल तक नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, वैसी घटना किसी अन्य छात्र के साथ नहीं होनी चाहिए। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद कई छात्र भी भावुक नजर आए।
छात्रों की समस्याएं सुनने पर दिया जोर
राहुल गांधी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की समस्याओं को समझना और उनका समाधान निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्रों से अपनी बात खुलकर रखने की अपील की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
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