Saket Building Collapse: दिल्ली के साउथ इलाके में स्थित साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। बताया जा रहा है की पांच मंजिला इमारत गिरने की इस घटना में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हादसे के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) को निलंबित कर दिया है।
पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिरी
मिली जानकारी के अनुसार, साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट सैदुलअजाइब इलाके में स्थित एक पांच मंजिला इमारत शनिवार शाम अचानक ढह गई। बता दें की हादसे के समय ग्राउंड फ्लोर पर कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य जारी था। इमारत में पीजी, ऑफिस, कैफे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरने के समय वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 70 से 80 लोग आसपास मौजूद थे, जिनमें कई विदेशी छात्र और मेडिकल अभ्यर्थी भी शामिल थे।
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स और NEET-PG अभ्यर्थी प्रभावित
इस हादसे में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) और NEET-PG की तैयारी कर रहे कई युवा डॉक्टर प्रभावित हुए हैं। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जसवंत ने बताया कि राहत एवं बचाव दल ने अब तक 9 से 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। जिसमें उन्होंने कहा कि इस घटना से मेडिकल समुदाय में गहरा दुख और चिंता का माहौल है। कई युवा डॉक्टर, जो अपने भविष्य को संवारने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, इस हादसे की चपेट में आ गए।
पांच लोगों की मौत की पुष्टि
एम्स और सफदरजंग अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। जिसमें सभी मृतकों को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था।
एम्स अस्पताल में कुल 11 घायल पहुंचाए गए थे। इनमें से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ घायलों में से तीन को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। पांच मरीजों का अभी भी इलाज चल रहा है। वहीं, मदन मोहन मालवीय अस्पताल से रेफर किए गए एक मरीज को सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक अन्य मृतक की भी पुष्टि अस्पताल प्रशासन ने की है।
राहत और बचाव अभियान जारी
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। ऐसे में प्रशासन का कहना है कि मलबे में अभी भी एक या दो लोगों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि बचाव कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। उनका कहना है कि भारी मशीनों और क्रेन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और मामले की जांच के आदेश दिए। जिसमें उन्होंने सभी अवैध और बिना अनुमति निर्मित इमारतों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। इसी क्रम में MCD के जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
15 साल पुरानी इमारत पर उठे सवाल
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह इमारत करीब 15 वर्ष पहले लगभग 400 वर्ग गज क्षेत्र में दो मंजिला भवन के रूप में बनाई गई थी। बाद में धीरे-धीरे अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में पांचवीं मंजिल के ऊपर एक और तल बनाने का काम चल रहा था। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग और निर्माण मानकों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है। इमारत का मालिक कर्मवीर जेलर नामक व्यक्ति बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां भवन निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल
हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। आसपास के लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई इमारतों में नियमों के विपरीत अतिरिक्त निर्माण किया गया है, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रभावित परिवारों और छात्रों में भी भारी नाराजगी है। कई अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर
बता दें की घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने खास ग्रीन कॉरिडोर बनाया। इसके जरिए एंबुलेंस को बिना किसी बाधा के अस्पतालों तक पहुंचाया गया। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरी गंभीरता के साथ जारी है और मलबे में फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
जानकारी के लिए बता दें की फिलहाल इस हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती संकेत अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
साकेत इमारत हादसे ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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