Satluj Controversy: अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ (जिसे पहले ‘Punjab 95’ के नाम से जाना जाता था) एक बार फिर विवादों में है। फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने दावा किया है कि केंद्र सरकार के एक मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र के बाद OTT प्लेटफॉर्म Zee5 ने फिल्म की स्ट्रीमिंग रोक दी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब फिल्म की रिलीज, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। निर्देशक का यह बयान मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में सामने आया है। हालांकि, सरकार या Zee5 की ओर से इन दावों पर इस खबर लिखे जाने तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है पूरा मामला?
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म पिछले कई वर्षों से रिलीज का इंतजार कर रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म लंबे समय तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में प्रमाणन प्रक्रिया से जुड़ी रही। फिल्म के निर्माताओं ने बाद में कानूनी रास्ता भी अपनाया। मामला अदालत तक पहुंचा और इसके बाद फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का निर्णय लिया गया। बताया गया कि फिल्म 3 जुलाई को Zee5 पर उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन लगभग 48 घंटे के भीतर इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।
निर्देशक हनी त्रेहान ने क्या कहा?
एक मीडिया इंटरव्यू में हनी त्रेहान ने दावा किया कि फिल्म को OTT पर रिलीज करने का फैसला निर्माता और प्लेटफॉर्म का था। उनके अनुसार, बाद में सरकारी स्तर से एक पत्र भेजे जाने के बाद रिलीज रोक दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी कुछ दिन पहले फोन के माध्यम से दी गई थी। निर्देशक ने यह भी दावा किया कि प्लेटफॉर्म फिल्म को किसी दूसरे नाम से रिलीज करने पर विचार कर रहा था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
चार साल तक अटकी रही फिल्म
रिपोर्टों के अनुसार, यह फिल्म करीब चार वर्षों तक प्रमाणन प्रक्रिया में अटकी रही।फिल्म की कहानी पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम से प्रेरित बताई जाती है। इसी वजह से इसकी रिलीज को लेकर लगातार चर्चा होती रही। निर्माताओं का कहना रहा है कि वे फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते थे, जबकि सेंसर से जुड़े मुद्दों के कारण इसमें देरी होती रही।
OTT से हटने के बाद बढ़ा विवाद
फिल्म के प्लेटफॉर्म से हटने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे सेंसरशिप से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों को कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। इस बीच फिल्म को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
पंजाब में हुई सार्वजनिक स्क्रीनिंग
OTT से फिल्म हटने के बाद पंजाब के कुछ स्थानों पर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग आयोजित किए जाने की खबरें भी सामने आईं। इन स्क्रीनिंग्स के जरिए फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आयोजनों को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
Zee5 और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
निर्देशक हनी त्रेहान ने जो दावे किए हैं, उन पर अभी तक Zee5 या संबंधित सरकारी मंत्रालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इस पूरे विवाद पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
फिल्म को लेकर पहले भी रही चर्चा
यह पहली बार नहीं है जब इस फिल्म को लेकर विवाद हुआ हो। रिलीज में देरी, सेंसर प्रक्रिया और फिल्म के विषय को लेकर पहले भी कई बार चर्चा होती रही है। फिल्म के समर्थकों का कहना है कि इसे दर्शकों तक पहुंचना चाहिए, जबकि दूसरी ओर कुछ पक्ष इसकी सामग्री पर आपत्ति जताते रहे हैं।
सेंसरशिप और OTT पर फिर छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए नियामकीय प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि फिल्म दोबारा Zee5 पर रिलीज होगी या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी। यदि इस मामले में कानूनी या प्रशासनिक स्तर पर कोई नया घटनाक्रम होता है, तो फिल्म की रिलीज को लेकर आगे का रास्ता तय हो सकता है।
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