Sonam Wangchuk Health Update: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। बताया जा रहा है की भूख हड़ताल के 15वें दिन उनका ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर से नीचे पहुंच गया है, जबकि उनका वजन भी करीब 8 किलो कम हो चुका है। एसेद में डॉक्टर लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वांगचुक ने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
जानकारी के लिए बता दें स्वास्थ्य में गिरावट के बीच भी सोनम वांगचुक का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। उन्होंने देशभर के युवाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना आदर्श मानने के बजाय खुद अपनी जिम्मेदारियों को समझें और समाज के लिए आगे आएं। जिसमें उनका कहना है कि बदलाव तभी संभव होगा, जब हर नागरिक अपनी भूमिका निभाएगा।
‘मैं कोई हीरो नहीं, आप खुद अपने नायक बनें’
अनशन के दौरान जारी किए गए एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें किसी महापुरुष या नायक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि वे भी एक सामान्य नागरिक हैं, जो देश और युवाओं के भविष्य को लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि किसी एक व्यक्ति के भरोसे बदलाव की उम्मीद करना सही नहीं है। हर नागरिक को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना चाहिए। अगर देश का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे, तो किसी भी बड़े बदलाव के लिए अलग से किसी हीरो की जरूरत नहीं पड़ेगी।

15 दिन से जारी है आमरण अनशन
आपकी जानकारी के लिए बता दें सोनम वांगचुक पिछले 15 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। लंबे समय तक भोजन नहीं करने की वजह से उनके शरीर पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार, उनका ब्लड प्रेशर कम हो गया है और शरीर का वजन भी तेजी से घटा है। हालांकि, वांगचुक ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनके समर्थक भी लगातार जंतर-मंतर पर मौजूद हैं और आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
किस मुद्दे को लेकर हो रहा है प्रदर्शन?
दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन NEET पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। इस आंदोलन में कई छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
कॉकरोच जनता पार्टी का भी समर्थन
इस प्रदर्शन का समर्थन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी कर रही है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को 15 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देशभर के उन छात्रों और युवाओं की आवाज है, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता चाहते हैं।
अन्य लोग भी बैठे हैं आमरण अनशन पर
सोनम वांगचुक के साथ-साथ कई अन्य लोग भी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। इनमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े नेहा, मनीष, दीपक वर्मा और आमीन भी शामिल हैं। सभी प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
20 जुलाई के संसद मार्च का किया आह्वान
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में लोगों से 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि देश के सांसदों तक यह संदेश पहुंचना चाहिए कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
आंदोलन से जुड़े संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी उन छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की भी मांग कर रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या की।
संगठनों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता
ऐसे में लगातार 15 दिनों से चल रहे अनशन के कारण सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। डॉक्टर समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनकी तबीयत और गंभीर हो सकती है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और विभिन्न छात्र संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलन और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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