US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा ने दुनिया को बड़ी राहत दी है। बता दें की इस समझौते का स्वागत दुनियाभर के नेताओं ने किया है। ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक पहल का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम बताया है। जानकारी के मुताबिक इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि वह पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा की और कई देशों को नुकसान पहुंचाया।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के सफल क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अन्य लंबित मुद्दों का समाधान भी बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए ताकि एक स्थायी और व्यापक समझौता संभव हो सके।
दुनिया भर में समझौते का स्वागत
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक कदम बताया है। जिसमें कई देशों का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया था।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है। ऊर्जा आपूर्ति में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
समझौते में क्या-क्या शामिल?
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें सबसे अहम दोनों देशों के बीच सैन्य अभियानों को समाप्त करना है। इसके अलावा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने पर सहमति बनी है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी हटाने का भी फैसला लिया गया है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को फिलहाल अलग रखा गया है और उन पर भविष्य में अलग से बातचीत की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विषय अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है।
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
जानकारी के अनुसार इस समझौते को अंतिम रूप देने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। जिससे पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान दोनों इस बात पर सहमत हुए हैं कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर था और व्यापक संघर्ष की आशंका जताई जा रही थी। मध्यस्थता की इस प्रक्रिया को कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप ने की बड़ी घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और यह दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी भी तत्काल प्रभाव से हटा ली जाएगी।
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अब दुनिया भर के जहाज सामान्य रूप से समुद्री मार्गों का उपयोग कर सकेंगे और तेल आपूर्ति फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत
ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है। पिछले कई महीनों से पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था।
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से तेल और गैस की आपूर्ति आसान होगी, जिससे ऊर्जा बाजार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसका फायदा भारत सहित उन देशों को भी मिलेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
भारत का पश्चिम एशिया के देशों के साथ गहरा आर्थिक और रणनीतिक संबंध है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। ऐसे में क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा लाखों भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। क्षेत्र में तनाव कम होने से उनकी सुरक्षा और रोजगार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत ने इस समझौते का खुले तौर पर स्वागत किया है।



