West Bengal Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है, बता दें की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार किया है। वहीं, कोलकाता के लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल 35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। राज्यपाल आर.एन. रवि ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस कैबिनेट विस्तार के साथ पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है। सरकार ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी है। जिससे माना जा रहा है कि जल्द ही इन मंत्रियों के विभागों की भी घोषणा कर दी जाएगी।
केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद हुआ विस्तार
पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का यह बड़ा विस्तार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद संभव हो सका। जिसमें सूत्रों का कहना है की, पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश भाजपा नेताओं ने पार्टी आलाकमान के साथ विस्तृत चर्चा की थी। साथ ही, बैठक में क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक जरूरतों और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए 35 नामों को अंतिम मंजूरी दी गई। इसके बाद सोमवार को सभी विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सरकार को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनावों की रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

13 नेताओं को मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा
बता दें की सरकार ने 13 विधायकों को सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया है। इनमें कई अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है।
- दीपक बर्मन
- तापस रॉय
- डॉ. शंकर घोष
- मनोज कुमार उरांव
- अर्जुन सिंह
- गौरी शंकर घोष
- स्वपन दासगुप्ता
- जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
- डॉ. कल्याण चक्रवर्ती
- अजय कुमार पोद्दार
- डॉ. शारद्वत मुखर्जी
- दूध कुमार मंडल
- अरूप कुमार दास
3 नेताओं को मिला स्वतंत्र प्रभार
मुख्यमंत्री ने इन तीन नेताओं को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। जिससे अब इन मंत्रियों को अपने विभागों में स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार होगा।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
- डॉ. इंद्रनील खान
- मालती रावा राय
- राजेश महतो
19 विधायक बने राज्य मंत्री
मंत्रिमंडल विस्तार में 19 विधायकों को राज्य मंत्री बनाया गया है। इनमें कई जिलों और समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
- जोएल मुर्मू
- डॉ. हरे कृष्ण बेरा
- आनंदमय बर्मन
- अशोक डिंडा
- नदियार चंद बाउरी
- विशाल लामा
- शांतनु प्रमाणिक
- मौमिता विश्वास मित्रा
- उमेश राय
- पूर्णिमा चक्रवर्ती
- कौशिक चौधरी
- भास्कर भट्टाचार्य
- दिवाकर घरामी
- अमिया किस्कू
- कलिता माझी
- गार्गी घोष दास
- बिराज विश्वास
- दीपंकर जना
- सुमना सरकार
अब मंत्रिमंडल में कुल 41 सदस्य
अब 35 नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ पश्चिम बंगाल सरकार का मंत्रिमंडल और मजबूत हो गया है। जिससे राज्य मंत्रिपरिषद में कुल 41 सदस्य शामिल हैं। भारतीय संविधान के प्रावधानों के मुताबिक किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से ज्यादा नहीं हो सकती। वहीं, इस संवैधानिक सीमा को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के पास अभी भी तीन और मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश मौजूद है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार जरूरत और राजनीतिक समीकरणों के अनुसार मंत्रिमंडल का एक और विस्तार कर सकती है।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर जोर
जानकारी के मुताबिक इस विस्तार में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, दक्षिण बंगाल और सीमावर्ती इलाकों के प्रतिनिधियों को जगह दी गई है। साथ ही अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिला नेताओं को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि भाजपा नेतृत्व ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कैबिनेट बनाने की कोशिश की है। कई नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल का संदेश दिया है।
विभागों की घोषणा का इंतजार
मंत्रिमंडल विस्तार पूरा होने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा नए मंत्रियों को मिलने वाले विभागों को लेकर हो रही है। जिसमें फिलहाल राज्य सरकार की ओर से किसी भी मंत्री के विभाग का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जल्द ही विभागों का बंटवारा कर सकते हैं। कैबिनेट में शामिल कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को गृह, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे जाने की संभावना है। विभागों की घोषणा के बाद सरकार की कार्ययोजना और प्राथमिकताएं भी स्पष्ट हो जाएंगी।
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