Yogi Adityanath Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा कैबिनेट विस्तार आज होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए 6 नए विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला किया है। लखनऊ स्थित जनभवन में दोपहर 3:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।
जानकारी के लिए बता दें कि इस कैबिनेट विस्तार को केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी ने सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, महिला भागीदारी और विपक्ष के PDA समीकरण का जवाब देने की कोशिश की है।
ये 6 नए चेहरे बनेंगे मंत्री
योगी मंत्रिमंडल में जिन नेताओं को शामिल किया जा रहा है, उनमें भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, पूजा पाल, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा का नाम शामिल है। इन सभी नेताओं का अलग-अलग क्षेत्रों और जातीय समीकरणों में प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि बीजेपी ने इन चेहरों के जरिए कई वर्गों को साधने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीती शाम राज्यपाल Anandiben Patel से मुलाकात कर नए मंत्रियों की सूची सौंपी थी, जिसके बाद शपथ ग्रहण कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा विस्तार
उत्तर प्रदेश में मार्च 2022 में योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की थी। पहले मंत्रिमंडल में 18 कैबिनेट मंत्री, 14 स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और 20 राज्यमंत्री बनाए गए थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव 2024 से पहले 5 मार्च 2024 को पहला कैबिनेट विस्तार हुआ था। पहले विस्तार में Om Prakash Rajbhar, अनिल कुमार, सुनील कुमार शर्मा और दारा सिंह चौहान को मंत्री बनाया गया था। हालांकि बाद में जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान वाल्मीकि के सांसद बनने के बाद मंत्री पद खाली हो गए थे। अब उन्हीं खाली पदों को भरने की तैयारी की गई है।
महिला वोट बैंक पर BJP का खास फोकस
बता दें कि इस बार कैबिनेट विस्तार में महिलाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है। छह नए मंत्रियों में दो महिलाओं को शामिल किया गया है। पूजा पाल और एक अन्य महिला चेहरे को मौका देकर बीजेपी ने महिला मतदाताओं को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि BJP महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को लगातार आगे बढ़ा रही है। ऐसे में कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर पार्टी चुनावी लाभ लेने की रणनीति पर काम कर रही है।
PDA राजनीति का जवाब देने की कोशिश
समाजवादी पार्टी लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बीजेपी ने भी अपने मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन बनाकर विपक्ष की रणनीति का जवाब देने का प्रयास किया है। मनोज पांडेय और पूजा पाल पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। दोनों नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार माना जाता है। बीजेपी को उम्मीद है कि इन चेहरों के जरिए वह विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।

क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश
कैबिनेट विस्तार में बीजेपी ने अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने पर भी ध्यान दिया है।
- भूपेंद्र चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आते हैं और जाट समुदाय में मजबूत पकड़ रखते हैं। वह पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
- कृष्णा पासवान फतेहपुर से तीन बार विधायक रह चुके हैं और दलित समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
- सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक हैं और पश्चिमी यूपी में प्रभाव रखते हैं।
- हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी क्षेत्र से आते हैं, जो प्रधानमंत्री Narendra Modi का संसदीय क्षेत्र है। विश्वकर्मा समाज में उनकी अच्छी पहचान मानी जाती है।
2027 चुनाव की तैयारी में जुटी BJP
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन बीजेपी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है। कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी सभी वर्गों और क्षेत्रों को साथ लेकर चल रही है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजेपी आगामी चुनाव में जातीय समीकरणों के साथ विकास और कानून व्यवस्था को भी बड़ा मुद्दा बनाएगी। ऐसे में मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्ष क्या कह रहा है?
विपक्ष ने इस कैबिनेट विस्तार को चुनावी स्टंट बताया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी केवल चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन दिखाने की कोशिश कर रही है। हालांकि बीजेपी का दावा है कि पार्टी लगातार संगठन और सरकार में नए चेहरों को मौका देती रही है और यह विस्तार विकास को गति देने के लिए किया जा रहा है।
BJP की रणनीति कितनी सफल होगी?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण हमेशा से अहम रहे हैं। बीजेपी ने इस कैबिनेट विस्तार में दलित, पिछड़ा, महिला और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर बड़ा दांव खेला है। ऐसे में अब देखना होगा कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह रणनीति पार्टी को कितना फायदा पहुंचाती है। लेकिन इतना तय है कि योगी कैबिनेट का यह विस्तार केवल मंत्री बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीजेपी ने कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
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