Ahmedabad Air Crash : 12 जून 2025 को देश ने आधुनिक विमानन इतिहास की सबसे दर्दनाक त्रासदियों में से एक देखी थी। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के हादसे ने न सिर्फ 260 लोगों की जान ले ली, बल्कि सैकड़ों परिवारों की खुशियां भी हमेशा के लिए छीन लीं। अब इस हादसे को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन पीड़ित परिवारों के मन में आज भी वही सवाल गूंज रहा है, आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था जिसने कुछ ही सेकंड में इतने लोगों की जिंदगी खत्म कर दी? हादसे की पहली बरसी पर पूरे देश की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। पीड़ित परिवार उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें आखिरकार यह पता चलेगा कि इस दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और जिम्मेदारी किसकी थी।
12 जून 2025: वह दिन जिसने देश को झकझोर दिया
12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। विमान में 230 यात्री और 12 चालक दल के सदस्य सवार थे। उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और Ahmedabad के मेघाणीनगर क्षेत्र में स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर जा गिरा। विमान टकराने के बाद आग के विशाल गोले में बदल गया।
260 लोगों की गई जान
इस भीषण हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक यात्री जीवित बच पाया। वहीं जमीन पर भी कई लोग इसकी चपेट में आए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस त्रासदी में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। इनमें विमान के यात्री, चालक दल के सदस्य और जमीन पर मौजूद लोग शामिल थे। इस हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की भी मृत्यु हुई थी, जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी।
एक साल बाद भी नहीं भर पाए घाव
हादसे के एक साल बाद भी कई परिवार सामान्य जीवन में वापस नहीं लौट पाए हैं। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने बेटी, किसी ने जीवनसाथी और कई परिवारों ने एक ही दिन में अपने कई सदस्यों को खो दिया। समय के साथ आंखों के आंसू भले कम हुए हों, लेकिन दिल के जख्म आज भी ताजा हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि सच जानना है। वे जानना चाहते हैं कि आखिर यह हादसा क्यों हुआ और क्या इसे रोका जा सकता था।
जांच कहां तक पहुंची?
हादसे के तुरंत बाद भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने जांच शुरू की थी। जांच में अमेरिका, ब्रिटेन और विमान निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया। जांचकर्ताओं ने ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और इंजन से जुड़े तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया। हाल के महीनों में जांच का फोकस विमान के फ्यूल कंट्रोल सिस्टम और इंजन संचालन पर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति क्यों बाधित हुई।
रिपोर्ट में देरी क्यों?
अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार किसी बड़ी विमान दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर जारी करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में तकनीकी जांच काफी जटिल रही है। इंजन के कई हिस्सों की विदेशों में जांच की गई है और विभिन्न देशों की एजेंसियां इसमें शामिल रही हैं। इसी वजह से अंतिम रिपोर्ट में देरी की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच एजेंसियां फिलहाल एक अंतरिम प्रगति रिपोर्ट जारी कर सकती हैं।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर हुआ क्या था?
हादसे के बाद से कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। क्या यह तकनीकी खराबी थी? क्या इंजन में कोई समस्या आई थी? क्या विमान के किसी महत्वपूर्ण सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था? या फिर कोई अन्य कारण था?
जांच एजेंसियों ने अभी तक अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए किसी भी कारण को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
अकेले बचे यात्री की अपील
इस दुर्घटना के एकमात्र जीवित बचे यात्री ने भी जांच एजेंसियों से पारदर्शिता और सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि हादसे के बाद से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है और पीड़ित परिवारों को जवाब मिलना चाहिए।
विमानन सुरक्षा पर भी उठे सवाल
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं था, बल्कि इसने विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रिपोर्ट में जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, वे एयरलाइन उद्योग और सुरक्षा मानकों के लिए दिशा तय कर सकते हैं।
पीड़ित परिवारों की एक ही मांग
हादसे की बरसी पर कई परिवारों ने कहा है कि उन्हें केवल संवेदना नहीं, बल्कि जवाब चाहिए। वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो, जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े। उनका कहना है कि यदि हादसे की वजह स्पष्ट नहीं होगी तो उनकी पीड़ा कभी कम नहीं होगी।
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