Jharkhand Students Protest: झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन आज सोमवार को काफी उग्र हो गया। बताया जा रहा है बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर मार्च करने के लिए आगे बढ़े। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटाने की कोशिश की और कुछ जगहों पर बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए। ऐसे में स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इसके अलावा वॉटर कैनन और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर तनाव बढ़ गया।
बता दें छात्रों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की है। प्रदर्शनकारी इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग भी कर रहे हैं।
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते गिरफ्तार
छात्रों के आंदोलन के बीच झारखंड CID ने झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। जिससे भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान उनसे पहले भी कई बार पूछताछ की जा चुकी थी।
जानकारी के अनुसार, खियांग्ते से 28 जुलाई से लगातार पूछताछ की जा रही थी। अब CID ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े मामले में जांच चल रही है। खियांग्ते पर आरोप है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराने के लिए ऐसी कंपनी को पैनल में शामिल किया गया, जिसे पहले ब्लैकलिस्ट किया गया था। जांच एजेंसी इसी समेत अन्य आरोपों की पड़ताल कर रही है।
22 जुलाई को दिया था इस्तीफा
जानकारी के लिए बता दें एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई को JPSC चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था। ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद भी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद और जांच का सिलसिला जारी रहा।
दरअसल CID की जांच में कई बिंदुओं पर आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से दोषी मानना उचित नहीं होगा। CID की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
JPSC के तीन सदस्यों ने भी दिया इस्तीफा
इस मामले में JPSC के तीन अन्य सदस्यों के इस्तीफे ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। जिससे रविवार को अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने इन तीनों सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। बताया गया कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID ने आयोग के सदस्यों को पूछताछ के लिए समन भेजा था। इसके बाद इन सदस्यों ने इस्तीफा दिया। वही आज सोमवार को CID की टीम ने इन सदस्यों से भी पूछताछ की। ऐसे में अब जांच का दायरा JPSC के पूर्व चेयरमैन के साथ-साथ आयोग के अन्य पदाधिकारियों तक भी पहुंच गया है।

छात्रों की मांग- CBI करे पूरे मामले की जांच
रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही कथित अनियमितताओं से युवाओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है। छात्र पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए लंबे समय तक तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि गड़बड़ी के कारण मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया।
ED की भी हुई एंट्री
JPSC विवाद से जुड़े मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की भी एंट्री हो गई है। एजेंसी ने Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के तहत मामले की जांच शुरू की है।
अधिकारियों के अनुसार, ED झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के वित्तीय पहलू की जांच कर रही है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा सहित राज्य की अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों को भी देखा जा रहा है।
ED ने झारखंड पुलिस की CID द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अलावा कुछ अन्य शिकायतों को भी जांच के दायरे में लिया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित परीक्षा अनियमितताओं के पीछे कोई वित्तीय लेन-देन या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा पहलू तो नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी, आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे और ED की जांच के बाद भर्ती परीक्षा विवाद और गंभीर हो गया है। दूसरी ओर, छात्रों का आंदोलन भी जारी है।
ऐसे में अब सभी की नजर CID और ED की जांच पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के पीछे कौन जिम्मेदार है और इसमें किसी वित्तीय अनियमितता की भूमिका रही है या नहीं। छात्रों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल रांची में छात्र आंदोलन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई, दोनों ही झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।



