Paper Leak Case: देशभर में सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। जिसमें एजेंसी ने बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, असम, कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में दर्ज पेपर लीक से जुड़ी पुलिस FIRs को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी है। इन मामलों में ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ECIR दर्ज की है।
मिली जानकारी के अनुसार, ED की इस कार्रवाई के बाद अब जांच केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहेगी है, बल्कि परीक्षा माफियाओं के पैसों के लेन-देन, अवैध कमाई, बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल होगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि पेपर लीक के जरिए कितनी रकम जुटाई गई और इस पैसे को किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
कई राज्यों की FIRs को ED ने किया टेकओवर
अधिकारियों के मुताबिक, पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों में अलग-अलग राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज FIRs को ED ने अपने जांच दायरे में लिया है। इनमें राजस्थान, हरियाणा, असम, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं।
पुलिस की FIR के आधार पर ED अपनी ECIR दर्ज करती है। इसके बाद एजेंसी को मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच करने का अधिकार मिलता है। ऐसे में अब जांच एजेंसी उन लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखेगी, जिन पर पेपर लीक या परीक्षा से जुड़ी धांधली में शामिल होने का आरोप है।
अब ऐसे में ED यह भी जांच करेगी कि परीक्षा माफिया तक पैसा कैसे पहुंचा, अभ्यर्थियों से कितनी रकम ली गई और इस रकम को आगे कहां निवेश या ट्रांसफर किया गया।
पेपर लीक के पीछे वित्तीय नेटवर्क की होगी जांच
दरअसल पेपर लीक के मामलों में अक्सर बड़ी रकम के लेन-देन की बात सामने आती है। जिसमें ED अब इसी वित्तीय नेटवर्क को खंगालने की तैयारी में है। एजेंसी संदिग्ध आरोपियों के बैंक खातों, प्रॉपर्टी, कंपनियों, लेन-देन और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।
बता दें जांच का मुख्य उद्देश्य यह भी पता लगाना होगा कि पेपर लीक से मिलने वाला पैसा किस तरह इस्तेमाल किया गया। अगर किसी आरोपी ने अवैध कमाई से संपत्ति खरीदी या पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर किया है, तो ED उस मनी ट्रेल को भी ट्रैक करेगी। इस कार्रवाई से परीक्षा माफियाओं के उस नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिश की जा रही है, जो कथित तौर पर पेपर लीक के जरिए छात्रों और अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलता है।

JPSC मामले में भी ECIR दर्ज
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का मामला भी ED की जांच के दायरे में आ गया है। जिसमें रांची CID की ओर से दर्ज FIR के आधार पर ED ने ECIR दर्ज की है। ऐसे में अब एजेंसी इस मामले में कथित वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी। जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि परीक्षा में गड़बड़ी के जरिए किसी तरह का आर्थिक लाभ उठाया गया या नहीं। साथ ही संदिग्ध लोगों और उनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की भी जांच की जाएगी।
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले से ही जांच और कार्रवाई चल रही है। अब ED के शामिल होने के बाद मामले का वित्तीय पहलू भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
NEET-UG पेपर लीक मामले पर भी ED की नजर
परीक्षा धांधली के सबसे चर्चित मामलों में से एक NEET-UG पेपर लीक मामला भी है। अधिकारीयों के मुताबिक, ED इस मामले में भी वित्तीय एंगल से जांच में शामिल हो सकती है। एजेंसी का फोकस कथित पेपर लीक से जुड़े वित्तीय सिंडिकेट और पैसों के लेन-देन पर हो सकता है।
NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की किसी भी घटना का सीधा असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ता है। अब ED की संभावित जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अगर अवैध तरीके से पैसे का लेन-देन हुआ है, तो उसका नेटवर्क कितना बड़ा था।
बैंक खातों और संपत्तियों पर भी नजर
ED की जांच में आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड अहम भूमिका निभा सकते हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरोपियों के खातों में अचानक बड़ी रकम जमा हुई या नहीं और क्या उस रकम का संबंध परीक्षा में गड़बड़ी से है। इसके अलावा संपत्तियों की खरीद, संदिग्ध कंपनियों में निवेश और दूसरे वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। अगर किसी आरोपी द्वारा कथित अपराध से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल संपत्ति बनाने में किया गया है, तो ED उस संपत्ति और पैसे के स्रोत की जांच कर सकती है।
सरकार का सख्त संदेश
पेपर लीक के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया है। जिसमें अब अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों के वित्तीय पहलुओं की जांच ED द्वारा किए जाने से परीक्षा माफियाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ केवल आपराधिक कार्रवाई ही न हो, बल्कि उनकी अवैध कमाई और वित्तीय नेटवर्क को भी खत्म किया जाए।
ED की जांच आगे बढ़ने के साथ कई आरोपियों से पूछताछ, वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल और संदिग्ध लेन-देन की जांच हो सकती है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
NEET परीक्षा रद्द होने के बाद फिर हुआ था एग्जाम
NEET-UG परीक्षा को लेकर भी पहले गंभीर विवाद सामने आया था। 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था।
ऐसे में अब छात्रों के हित को देखते हुए 12 जून को दोबारा NEET-UG परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा के बाद परिणाम भी जारी किया गया। अब इस पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन की जांच होती है तो ED यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित धांधली के पीछे किसी संगठित आर्थिक नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।



