Bhopal Farmer Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। सरकार और किसानों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि इस बार पहले से अधिक मात्रा में मूंग की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी। इसके साथ ही खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का भी फैसला लिया गया है। सरकार के इन आश्वासनों के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
क्या था किसानों का आंदोलन?
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान नर्मदापुरम और आसपास के कई जिलों से पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे थे। किसानों ने राजधानी के वीर सावरकर सेतु के पास डेरा डालकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। किसानों का कहना था कि उन्हें अपनी मूंग की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। साथ ही खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने से खेती का काम भी प्रभावित हो रहा था।
किसानों की क्या थीं मुख्य मांगें?
आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी थीं। इनमें प्रमुख मांगें थीं:-
- मूंग की 100 प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाए।
- खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार या इसे समाप्त किया जाए।
- किसानों को समय पर उचित दर पर यूरिया उपलब्ध कराया जाए।
- खरीदी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
- किसानों को फसल बेचने में किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी न हो।
किसानों का कहना था कि यदि इन मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया जाता, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
सरकार और किसानों के बीच कैसे बनी बात?
किसानों के आंदोलन को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने बातचीत के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति ने किसान प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की चर्चा की। बैठक के दौरान सरकार ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया। लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
सरकार ने क्या-क्या आश्वासन दिए?
सरकार ने किसानों को कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं। सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि मूंग की खरीद पहले की तुलना में अधिक मात्रा में MSP पर की जाएगी, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। दूसरा बड़ा फैसला खाद वितरण से जुड़ा है। सरकार ने घोषणा की कि ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी। किसानों का कहना था कि इस व्यवस्था के कारण उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था और समय पर खाद नहीं मिल पाती थी। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि किसानों की अन्य मांगों पर भी चरणबद्ध तरीके से सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किन मंत्रियों की बनी थी समिति?
किसानों से बातचीत के लिए राज्य सरकार ने चार सदस्यीय समिति बनाई थी।
इस समिति में:-
- कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना
- मंत्री विश्वास सारंग
- मंत्री कृष्णा गौर
- मंत्री राकेश सिंह
को शामिल किया गया था। समिति ने किसान नेताओं के साथ चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया और अंततः बातचीत सफल रही।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आंदोलन समाप्त होने के बाद कहा कि उनकी सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और आगे भी किसानों के हितों की रक्षा करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकले। उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है। उनके अनुसार किसान संगठनों और सरकार के सहयोग से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
ई-टोकन व्यवस्था क्यों बनी थी विवाद की वजह?
सरकार ने पहले खाद वितरण को व्यवस्थित बनाने के लिए ई-टोकन प्रणाली लागू की थी। लेकिन किसानों का आरोप था कि यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से सफल नहीं रही। कई किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पा रहे थे। जिन किसानों को टोकन मिलता भी था, उन्हें खाद लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई जगह सर्वर संबंधी समस्याएं भी सामने आईं। इसी वजह से किसान लगातार इस व्यवस्था को हटाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला लिया है, जिसे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मूंग खरीदी किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान मूंग की खेती करते हैं। यदि सरकार MSP पर पर्याप्त मात्रा में खरीद नहीं करती, तो किसानों को अपनी फसल खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। इसी कारण किसान लगातार मांग कर रहे थे कि सरकार मूंग की पूरी या अधिकतम संभव मात्रा MSP पर खरीदे। सरकार के नए आश्वासन से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
आंदोलन खत्म होने से क्या होगा फायदा?
आंदोलन समाप्त होने के बाद राजधानी भोपाल में सामान्य स्थिति बहाल होने लगी है। किसानों के वापस लौटने से यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर पड़ रहा असर भी कम होगा। वहीं किसानों को उम्मीद है कि सरकार अपने वादों को जल्द लागू करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार समय पर MSP पर खरीदी और खाद उपलब्ध कराने के वादे को पूरा करती है, तो इससे किसानों का भरोसा मजबूत होगा और भविष्य में ऐसे आंदोलनों की संभावना भी कम हो सकती है।
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