BRICS Summit 2026: देश की राजधानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) का आगाज हो चुका है। भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के प्रमुख नेता और अन्य देशों के प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की शुरुआत की और सभी विदेशी नेताओं का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में सहयोग, बहुपक्षवाद और सुधारों की जरूरत पर जोर दिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत इस वर्ष चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। संगठन के सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और किसी के खिलाफ नहीं हैं। भारत का प्रयास सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ने का है।
UN सुरक्षा परिषद में सुधार पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों ही नेताओं के बीच वैश्विक संघर्ष, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, सतत विकास, मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
उनकी इस अहम बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक संस्थाओं को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। पीएम मोदी और गुतारेस ने भी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर विचारों को व्यक्त किया।
‘किसी के खिलाफ नहीं, सभी को साथ है’
ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने संगठन की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अहम पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सदस्य देश एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी साफ तौर पर कहा है कि ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य किसी देश के खिलाफ खड़ा होना नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। ऐसे समय में जब दुनिया कई क्षेत्रों में संघर्ष और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत की ओर से संवाद और सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।
20 साल पूरे कर रहा BRICS
वहीं, साल 2026 ब्रिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस साल समूह की स्थापना के 20 साल पूरे हो हुए हैं। बता दें कि भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। भारत की अध्यक्षता में इस साल ब्रिक्स की थीम ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखी गई है। इसका फोकस लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर है।
ब्रिक्स का लगातार हुआ विस्तार
जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। इसके बाद संगठन का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश इसमें शामिल हुए। इसके अलावा कई अन्य देशों को पार्टनर कंट्री का दर्जा दिया गया है। इस समय ब्रिक्स का दायरा पहले की तुलना में काफी अधिक बड़ा और मजबूत बन चुका है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता वाले इस सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के लिहाज से भी अहम है।
पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मुलाकात
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी मुलाकात की। जहां दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया।
RICS Summit में इन मुद्दों पर रहेगी नजर
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक संघर्षों जैसे मुद्दों पर चर्चा करने की संभावना जताई जा रही है। इस सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा की जा रही है। ऐसे में भारत की पूरी कोशिश है कि ब्रिक्स को सिर्फ बातचीत का मंच तक ही सीमित न रखें, बल्कि इसमें ऐसे फैसलों और पहलों की दिशा में आगे बढ़ाया जाए, जिनका असर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर हो।
दिल्ली ट्रैफिक को लेकर एडवाइजरी
ब्रिक्स सम्मेलन के चलते दिल्ली में ट्रैफिक एडवाइजरी भी पहले से जारी कर दी गई थी, ताकि आम लोगों समेत अन्य विशेष अतिथियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। दरअसल, भारत मंडपम और प्रगति मैदान के आसपास कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए हैं। रिंग रोड, मथुरा रोड, भैरों मार्ग, तिलक मार्ग, इंडिया गेट और सी-हेक्सागन क्षेत्र सहित कई इलाकों में यातायात प्रभावित हो सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने और संभव हो तो मेट्रो का इस्तेमाल करने की अपील की है।
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