CJP Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच आज सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। बता दें की पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। बैठक के बाद CJP ने कहा कि उनकी बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना है।
मिली जानकारी के अनुसार, संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला है। पुलिस ने जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोक दिया है, जिसके बाद कई जगह धक्का-मुक्की और नारेबाजी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
जेपी नड्डा को सौंपा मांगों का पत्र
CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों का विस्तृत पत्र सौंपा। जिसमें प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि बैठक के दौरान मंत्री ने उनकी सभी बातों को ध्यान से सुना और हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के बाद CJP की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रतिनिधिमंडल को विश्वास है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। पार्टी ने यह भी कहा कि वह अपने सभी समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगी।
जेपी नड्डा ने क्या कहा?
दरअसल बैठक के बाद जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहली बार सरकार के साथ औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव आया था। साथ ही उन्होंने कहा कि सुबह से ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई और पूरे समय सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहा।
नड्डा के अनुसार, पहले प्रतिनिधिमंडल के साथ मौखिक चर्चा हुई और बाद में उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त करें और राजधानी में सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करें।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
आज सोमवार से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हुआ। इसी दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च का ऐलान किया था। जैसे ही प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने लगे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर संसद की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी थी। संसद भवन के आसपास के पूरे इलाके को हाई सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया।
जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में 5000 से अधिक पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए। कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित रहा और लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा।
किन मुद्दों को लेकर हो रहा है प्रदर्शन?
CJP का यह आंदोलन कई मुद्दों को लेकर चल रहा है। पार्टी का कहना है कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, खासकर NEET पेपर लीक मामले, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
इसके अलावा प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की कार्रवाई का भी विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया था।
सोनम वांगचुक के बाद अभिजीत दीपके ने संभाली जिम्मेदारी
जंतर-मंतर पर 28 जून से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल शुरू कर दी।
पार्टी का कहना है कि अभिजीत दीपके के साथ कई अन्य कार्यकर्ता भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका दावा है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक की शर्तें
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। हालांकि उनकी सभी शर्तों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन आंदोलनकारी लगातार सरकार से बातचीत की मांग कर रहे हैं।
CJP का कहना है कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी कायम है। पार्टी का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
छात्रों और अभिभावकों की बड़ी भागीदारी
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में केवल राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों से आए छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और उनके अभिभावक भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन स्थल पर लगातार नारेबाजी होती रही और कई लोगों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की।
अब आगे क्या होगा?
जेपी नड्डा से हुई बातचीत के बाद यह पहली बार है जब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच औपचारिक संवाद की शुरुआत हुई है। हालांकि अभी तक किसी मांग पर अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।
ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार CJP द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर क्या फैसला लेती है और क्या आंदोलनकारी अपनी रणनीति में कोई बदलाव करते हैं। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है, वहीं मांगें पूरी न होने पर प्रदर्शन और तेज होने के भी संकेत मिल रहे हैं।
ये भी पढ़ें: Jayant Chaudhary News: बीजेपी गठबंधन के बाद बदली RLD की चाल, अब ‘जाट-ब्राह्मण’ फॉर्मूले पर दांव



