CSMT Accident : मुंबई की लोकल ट्रेनें मुबाईवासियों के लिए lifeline माना जाता है, लेकिन गुरुवार को नारेबीजी के शोर और अचानक अफरा-तफरी के बीच एक बड़ा ट्रेन हादसा हो गया है। इस घटना में हर किसी को हिला कर रख दिया। दरअसल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर रेलवे इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की हड़ताल थी, जो ट्रैक पर थी।
बता दें कि नारेबाजी, आंदोलन और बहस के बीच ट्रेनें ठप हो गईं। इसी बीच हजारों लोग प्लेटफॉर्म से उतर गए और ट्रैक पर पैदल चलने लगे। उन्हें लगा कि इस दौरान ट्रैक पर ट्रेन आने का सही समय नहीं है, तो वह हड़ताल व पैदल चल सकते हैं।
ट्रेन की टक्कर से हुई लोगों की मौत
सूत्रों के अनुसार, हादसा CSMT और सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन के बीच आज शाम को हुआ। उसी दौरान एक लोकल ट्रेन तेज रफ्तार में आ रही थी। ट्रैक पर लगातार भीड़ थी और आगे बढ़ने की कोशिश में लोग पीछे से धक्का खाते हुए भी पटरी पार कर रहे थे।
ट्रेन चालक ने हॉर्न दिया लेकिन भीड़ इतनी शोर और नारेबाजी में खोई हुई थी कि ज्यादातर लोगों ने आवाज नहीं सुनी। ट्रेन की टक्कर इतनी तेज थी कि मौके पर ही तीन की मौत हो गई और कई लोगो घायल हो गए हैं। घटना के बाद तुंरत घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

धक्का खाकर पटरियों पर गिरे यात्री
मिली जानकारी के अनुसार, बताया जा रहा है कि कई लोग confused थे कि ट्रेनें चली भी रही हैं या नहीं। कुछ यात्रियों ने कहा कि भीड़ इतनी थी कि लोग धक्का खाकर पटरियों तक गिरने लगे थे। हादसे के बाद रेलवे पुलिस, RPF और स्थानीय प्रशासन टीम मौके पर पहुंची और करीब 15 से 20 मिनट तक ट्रैक को खाली करवाने में समय लगा।
इस ट्रेन हादसे में किसी गलती ?
अधिकारियों ने साफ किया कि इस पूरे मामले की जांच होगी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस समय यह कर्मचारी हड़ताल पर थे, उस समय किसी भी तरह का कोई crowd management या passenger movement का कोई emergency प्लान क्यों नहीं activate हुआ? सवाल यह भी हा कि क्या ट्रेन चालक को किसी भी तरह के समय पर संकेत नहीं मिला था? क्या communication टूटने की वजह से मुबई में इतना बड़ा हादसा हुआ?
बताया जा रहा है कि यह हड़ताल एक पुराने मामले-मुम्ब्रा हादसे में दो इंजीनियरों पर दर्ज FIR के विरोध में थे। जहां पर यूनियनों का आरोप है कि जिस तरह इंजीनियरों पर केस हुआ। वह सही नहीं है वह मनमानी है।
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