Donald Trump Tariff Cut: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने वैश्विक व्यापार और अमेरिकी उद्योगों को लेकर एक बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। बताया जा रहा है की ट्रंप प्रशासन ने कृषि उपकरणों और औद्योगिक मशीनों के आयात पर लगने वाले टैरिफ में 10 प्रतिशत की कटौती करने की घोषणा की है। जिससे इस फैसले के बाद इन उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह जाएगा।
व्हाइट हाउस के अनुसार यह नई व्यवस्था दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी। जिसमें प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी किसानों, उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आर्थिक राहत देना है, ताकि उत्पादन लागत कम हो और घरेलू निवेश को बढ़ावा मिल सके।
किन उत्पादों को मिलेगा टैरिफ में राहत?
आपकी जानकारी के लिए बता दें की नए आदेश के तहत कृषि और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण उत्पादों को शामिल किया गया है। जिसमें सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों को राहत मिलने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कृषि मशीनरी पर बड़ी राहत
दरअसल कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली मशीनों जैसे कंबाइन हार्वेस्टर, ट्रैक्टर से जुड़े उपकरण और अन्य भारी कृषि मशीनरी पर अब केवल 15 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। जिसमें पहले इन पर 25 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता था।
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे किसानों के लिए मशीनरी खरीदना सस्ता होगा और कृषि उत्पादन लागत में कमी आएगी। साथ ही कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक मशीनों पर भी कम होगा शुल्क
बता दें मोबाइल इंडस्ट्रियल मशीनरी जैसे बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट, लोडर और अन्य औद्योगिक वाहनों के आयात पर भी टैरिफ कम किया गया है। अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाली इन मशीनों पर अब पहले की तुलना में कम शुल्क देना होगा। इस फैसले से निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कम लागत पर मशीनरी उपलब्ध होने से उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है।
स्टील और एल्युमीनियम को लेकर खास प्रोत्साहन
ट्रंप प्रशासन ने घरेलू स्टील और एल्युमीनियम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक खास प्रावधान भी लागू किया है।
नई नीति के अनुसार यदि कोई विदेशी निर्माता ऐसे पूंजीगत उपकरण (Capital Equipment) अमेरिका में आयात करता है जिसमें वजन के हिसाब से कम से कम 85 प्रतिशत स्टील या एल्युमीनियम अमेरिकी मूल का हो, तो उसे केवल 10 प्रतिशत का सबसे कम टैरिफ देना होगा। हालांकि इस सुविधा का लाभ तभी मिलेगा जब इस्तेमाल किया गया स्टील और एल्युमीनियम अमेरिका में ही पिघलाया, ढाला या तैयार किया गया हो। सरकार का कहना है कि इससे अमेरिकी धातु उद्योग को नया प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है फैसला
व्हाइट हाउस ने इस नीति को केवल आर्थिक कदम नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला भी बताया है। जिसमें प्रशासन का कहना है कि स्टील, एल्युमीनियम और तांबे जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों में विदेशी निर्भरता कम करना अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में घरेलू उत्पादन को मजबूत करना आवश्यक है।
सरकार का मानना है कि मजबूत औद्योगिक आधार किसी भी देश की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण टैरिफ नीति में यह बदलाव किया गया है।

अमेरिकी उद्योगों को क्या होगा फायदा?
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस फैसले से कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधा लाभ मिल सकता है।
- कृषि क्षेत्र में मशीनरी की लागत कम होगी।
- किसानों को आधुनिक उपकरण खरीदने में आसानी होगी।
- औद्योगिक कंपनियों का उत्पादन खर्च घट सकता है।
- घरेलू स्टील और एल्युमीनियम उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से “अमेरिका फर्स्ट” नीति के समर्थक रहे हैं। बता दें की अपने पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने कई देशों से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने की कोशिश की थी। वहीं, अब नए फैसले के तहत कुछ विशेष क्षेत्रों में टैरिफ कम करके उत्पादन लागत घटाने और घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति अपनाई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन व्यापार संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका की इस नई टैरिफ नीति का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। जिन देशों से कृषि और औद्योगिक मशीनरी का आयात होता है, उन्हें अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर मिल सकते हैं।हालांकि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य देश इस फैसले पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।



