Import Duty On Gold: देश में सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने सोना-चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है. सरकार के इस फैसले के बाद बाजार में हलचल तेज हो गई है और लोगों के बीच यह चिंता बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें और ज्यादा महंगी हो सकती हैं. सरकार ने पहले जहां सोने और चांदी पर 6 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी, अब इसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है. यानी आयात शुल्क में करीब 150 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार का कहना है कि यह फैसला देश के विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व को सुरक्षित रखने और करंट अकाउंट डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, जब देश में सोने की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कमजोर होती है, तब सरकार ऐसे कदम उठाती है. इस बार भी सरकार ने बढ़ते आयात और वैश्विक तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया है.
मिडिल ईस्ट तनाव का भी असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारत की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है. अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ सकता है. इसी वजह से सरकार पहले से तैयारी करते हुए डॉलर की बचत पर जोर दे रही है.
प्रधानमंत्री की अपील के बाद फैसला
हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से एक साल तक सोना कम खरीदने की अपील की थी. इसके बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया. आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य लोगों को ज्यादा सोना खरीदने से रोकना और विदेशी मुद्रा का दबाव कम करना है.
क्या होगा आम लोगों पर असर?
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है. जब आयात शुल्क बढ़ता है, तो विदेश से आने वाला सोना महंगा हो जाता है. इसका असर ज्वेलरी बाजार और आम ग्राहकों की जेब पर भी दिखाई देता है. अब शादी-विवाह और निवेश के लिए सोना खरीदना पहले से ज्यादा महंगा पड़ सकता है.
बाजार में दिखा असर
सरकार के फैसले के तुरंत बाद सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला. MCX पर चांदी की कीमत करीब 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई. वहीं सोना 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
अब कितना लगेगा टैक्स?
सरकार के नए आदेश के बाद अब सोने पर 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस लगाया जाएगा. पहले यह दर 5 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 1 फीसदी AIDC थी. यानी कुल टैक्स भार में बड़ा इजाफा किया गया है.
सिर्फ टैक्स नहीं, बड़ा आर्थिक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ टैक्स बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि यह सरकार की बड़ी आर्थिक रणनीति का हिस्सा है. सरकार सोने की मांग कम करके डॉलर की बचत करना चाहती है. इसके जरिए फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है.
भारत में सोने की भारी मांग
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में शामिल है. देश में शादी, त्योहार और निवेश के लिए बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जाता है. इसी वजह से हर साल भारी मात्रा में सोने का आयात करना पड़ता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत ने सोना आयात करने पर करीब 71.98 बिलियन डॉलर खर्च किए थे.
सरकार को क्या उम्मीद?
सरकार को उम्मीद है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोने की मांग में कमी आएगी. अगर गोल्ड इंपोर्ट में 30 से 40 फीसदी तक की कमी आती है, तो भारत सालाना 20 से 25 बिलियन डॉलर तक बचा सकता है. यह राशि विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगी.
निवेशकों में बढ़ी चिंता
सरकार के इस फैसले के बाद निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है. कई व्यापारियों का कहना है कि महंगा सोना ग्राहकों की खरीदारी को प्रभावित कर सकता है. हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय बाजार में सोने की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी.
क्या और महंगा होगा सोना?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो भारत में सोना और महंगा हो सकता है. इसके अलावा वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी गोल्ड मार्केट को प्रभावित कर सकती हैं.
आम लोगों के लिए क्या सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सोना खरीदने से पहले बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है. अगर किसी को निवेश करना है, तो वह धीरे-धीरे निवेश की रणनीति अपना सकता है. वहीं शादी या जरूरी जरूरत के लिए खरीदारी करने वाले लोगों को कीमतों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है.
आगे क्या हो सकता है?
सरकार आने वाले समय में आर्थिक हालात के हिसाब से और कदम उठा सकती है. अगर गोल्ड इंपोर्ट कम नहीं होता या विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है, तो नीतियों में और बदलाव संभव हैं. फिलहाल सरकार का पूरा फोकस फॉरेक्स रिजर्व बचाने और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है.
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