Independence Day 2026: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार के दिन भारत के Micro, Small and Medium Enterprises यानि MSME सेक्टर की भूमिका को रेखांकित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि भारत देश आत्मनिर्भरता की तरफ और भी ज्यादा मजबूती से कदम बढ़ा सके और GDP में ज्यादा योगदान दे सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने MSMEs से कहा कि वे भारत के बढ़ते Free Trade Agreement (FTA) नेटवर्क का पूरा फायदा उठाएं। साथ ही उन्होंने बताया कि साल 2014 के बाद भारत ने करीब 40 देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। जिससे इन समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए विदेशी बाजारों में पहुंच बढ़ाने के नए अवसर तैयार हुए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं यहां खबर को लेकर पूरी जानकारी
भारतीय उत्पादों को ग्लोबल पहचान दिलाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि अपने उत्पादों को दुनिया के बाजारों में मजबूत जगह दिलानी है। जिसमें उन्होंने खासतौर पर टेक्सटाइल, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने MSME सेक्टर से अपील की है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया जाए। जिससे भारतीय कंपनियों को बेहतर क्वालिटी के साथ प्रतिस्पर्धी कीमत पर सामान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना होगा।
पीएम मोदी का कहना है कि भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में देश के छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने का बड़ा अवसर है।
FTA से भारतीय कारोबार को क्या फायदा?
Free Trade Agreement (FTA) दो या अधिक देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए किया जाने वाला समझौता है। इसके तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म किया जा सकता है। इससे संबंधित देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद मिलती है।
भारत ने हाल के वर्षों में UAE, Mauritius, Australia, United Kingdom, EFTA समूह और Oman जैसे देशों तथा समूहों के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। European Union और New Zealand के साथ भी व्यापार समझौतों को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बता दें इन समझौतों से भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद बेचने के लिए नए अवसर मिल सकते हैं। खासकर MSME सेक्टर के लिए यह बाजार विस्तार और निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
टेक्सटाइल और मशीनरी सेक्टर पर खास ध्यान
प्रधानमंत्री ने भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की क्षमता का विशेष उल्लेख किया है। जिसमें उन्होंने पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुपुर तक फैले टेक्सटाइल उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय कपड़ा उद्योग में वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की पूरी क्षमता है। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय उद्योगों को दुनिया में उपलब्ध उत्पादों से बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत पर सामान देने की दिशा में काम करना होगा। इससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
Seafood और Shrimp Export में भी बड़ी संभावनाएं
पीएम मोदी ने भारत के Seafood Industry की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने खासतौर पर Shrimp Export का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री उत्पादों के निर्यात में भारत के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।
FTA का फायदा देश के तटीय राज्यों के कारोबारियों को भी मिल सकता है। Kerala, Gujarat, Tamil Nadu और West Bengal जैसे राज्यों के एक्सपोर्टर्स के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा MSME सेक्टर
प्रधानमंत्री ने MSME सेक्टर को आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में देशों को अपने आर्थिक हितों और जरूरी संसाधनों को लेकर ज्यादा सतर्क रहना पड़ रहा है। जिसमें पेट्रोल, डीजल, खाद और दवाओं जैसे जरूरी संसाधनों की उपलब्धता वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भारत का आत्मनिर्भरता पर जोर देश की आर्थिक और रणनीतिक तैयारी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
MSME सेक्टर स्थानीय स्तर पर उत्पादन, रोजगार और सप्लाई चेन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस सेक्टर का विकास आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
GDP और रोजगार में MSME की बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने MSME सेक्टर के आर्थिक योगदान के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि MSMEs देश के मैन्युफैक्चरिंग में करीब 35.4 फीसदी, एक्सपोर्ट में लगभग 48.58 फीसदी और GDP में करीब 31.1 फीसदी योगदान देते हैं।
देश में 7.47 करोड़ से ज्यादा MSME Enterprises हैं, जिनसे 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। इस लिहाज से MSME सेक्टर कृषि के बाद रोजगार देने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में शामिल है।
वैश्विक स्तर पर भी MSMEs की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका है। दुनिया में कुल कारोबार का बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम उद्योगों से जुड़ा है और ये करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
आगे क्या है MSME सेक्टर की चुनौती?
ऐसे में अब MSME सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्लोबल क्वालिटी, टेक्नोलॉजी, लागत और समय पर डिलीवरी के मानकों को पूरा करना है। विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाना होगा।
प्रधानमंत्री का संदेश साफ है कि भारत के MSMEs को घरेलू बाजार से आगे बढ़कर ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बनानी होगी। FTA के जरिए मिले अवसरों का सही इस्तेमाल किया जाए तो भारतीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
ये भी पढ़ें: 80th Independence Day: राष्ट्रपति मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, कहा- ‘हमारे छात्र देश के भविष्य के निर्माता’



