India-Japan Summit: भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी एक नए दौर में प्रवेश कर गई है। बता दें दोनों देशों के बीच आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कई अहम घोषणाएं कीं है। इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण जापान की ओर से भारत में आने वाले वर्षों में 10 ट्रिलियन येन निवेश करने का ऐलान रहा। इसके अलावा रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), फार्मा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस शिखर सम्मेलन को भारत-जापान संबंधों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जिनमें दोनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बदलते वैश्विक माहौल में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना समय की जरूरत है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी जानकारी
भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश करेगा जापान
बैठक के दौरान जापान ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने की घोषणा की है। अब आने वाले सालों में जापान भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश करेगा। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत में उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
इसके साथ ही भारत में काम करने वाली जापानी कंपनियों की संख्या भी दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान के संबंध सालों से भरोसे और सहयोग पर आधारित रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक जापानी कंपनियों ने भारत में अपनी अलग पहचान बनाई है।
पीएम मोदी ने कहा कि अब दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों का सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होगा।
सेमीकंडक्टर और EV सेक्टर पर रहेगा खास फोकस
बैठक में भविष्य की तकनीकों पर खास जोर दिया गया। भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीकों के विकास पर भी सहमति बनी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सहयोग से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए भारत और जापान संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (Joint Naval Exercise) भी करेंगे। जिनमें दोनों नेताओं ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी एक जैसी सोच जाहिर की।
AI के क्षेत्र में संयुक्त पहल
बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने AI सहयोग पर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस पहल के तहत नई तकनीकों के विकास, रिसर्च और डिजिटल इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों देशों का लक्ष्य AI का उपयोग उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में बढ़ाना है।
फार्मा सेक्टर में भी साथ करेंगे काम
भारत और जापान ने फार्मा सेक्टर में भी साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं को दुनिया तक पहुंचाना है। इसके लिए रिसर्च, उत्पादन और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए लॉन्च होगी नई पहल
बता दें ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारत और जापान ने इंडिया-जापान बायो गैस इनिशिएटिव शुरू करने का ऐलान किया।
इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। दोनों देश हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी मिलकर काम करेंगे।
जापान की प्रधानमंत्री ने दिया भारत को भरोसा
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और क्षेत्रीय स्थिरता के भी साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि जापान भारत के साथ लंबे समय तक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान आने का निमंत्रण भी दिया।
भारत को क्या होगा फायदा?
जापान के 10 ट्रिलियन येन निवेश से भारत को कई बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है।
देश में विदेशी निवेश बढ़ेगा।
नई जापानी कंपनियां भारत में कारोबार शुरू करेंगी।
लाखों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
EV और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा।
AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी में नई संभावनाएं खुलेंगी।
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