Iran Internet Cable Crisis: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा है। इस युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल, व्यापार, सप्लाई चेन और शेयर बाजार पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। लेकिन अब एक नई चिंता तेजी से सामने आ रही है और वो है इंटरनेट सेवाओं पर खतरा। बताया जा रहा है की ईरान के एक बयान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, क्योंकि मामला समुद्र के नीचे बिछी उन इंटरनेट केबल्स से जुड़ा है जिन पर पूरी दुनिया का डिजिटल सिस्टम टिका हुआ है।
इंटरनेट को लेकर ईरान का बड़ा संकेत
जानकारी के लिए बता दें की ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान इंटरनेट केबल्स पर शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। यानी समुद्र के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबल्स के इस्तेमाल के बदले कंपनियों से फीस ली जा सकती है।
दरअसल यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि ईरान अब सिर्फ सैन्य और तेल मार्गों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है।
समुद्र के नीचे कैसे चलता है इंटरनेट?
अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सिर्फ मोबाइल टावर या सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। दुनिया का करीब 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है।
ये केबल्स हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं। इन्हीं के जरिए डेटा, वीडियो कॉल, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया और क्लाउड सेवाएं संचालित होती हैं। अगर इन केबल्स में किसी तरह की रुकावट आती है तो इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है, डेटा ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है और कई डिजिटल सेवाएं ठप पड़ सकती हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह इलाका खाड़ी देशों को दुनिया से जोड़ता है। अब तक इसे तेल सप्लाई के लिए अहम माना जाता था, लेकिन अब सामने आया है कि इंटरनेट के लिए भी इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी समुद्री क्षेत्र के नीचे इंटरनेट केबल्स का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। जिनमें एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाली कई प्रमुख फाइबर केबल्स इसी रास्ते से गुजरती हैं। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कौन-कौन सी इंटरनेट केबल्स गुजरती हैं यहां से?
खबरों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल्स मौजूद हैं। इनमें FALCON, GBICS, 2Africa, SeaMeWe 6 और AAE-1 जैसी प्रमुख केबल्स शामिल हैं। ये केबल्स दुनिया के करोड़ों इंटरनेट यूजर्स को जोड़ती हैं। इनके जरिए डेटा ट्रैफिक एशिया से यूरोप और अफ्रीका तक पहुंचता है। अगर इन नेटवर्क्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है या किसी तरह की रुकावट आती है तो इंटरनेट कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

भारत पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है?
भारत के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि इन अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल्स में से कई सीधे भारत के मुंबई और चेन्नई लैंडिंग स्टेशनों तक आती हैं। भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक बड़े स्तर पर इन्हीं नेटवर्क्स पर निर्भर करता है। यही केबल्स भारत को यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका से जोड़ती हैं। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई तकनीकी या राजनीतिक संकट पैदा होता है तो भारत में इंटरनेट सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
एयरटेल और जियो पर भी पड़ सकता है असर
भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे एयरटेल और जियो अंतरराष्ट्रीय डेटा कनेक्टिविटी के लिए इन्हीं समुद्री केबल नेटवर्क्स का इस्तेमाल करती हैं। यदि इंटरनेट केबल्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है या नेटवर्क बाधित होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर इंटरनेट प्लान्स की कीमतों और सेवाओं की गुणवत्ता पर भी दिख सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास कई वैकल्पिक रूट और बैकअप नेटवर्क मौजूद हैं, इसलिए पूरी तरह इंटरनेट बंद होने जैसी स्थिति की संभावना फिलहाल कम है। लेकिन स्पीड और कनेक्टिविटी पर असर से इनकार नहीं किया जा सकता।
आम लोगों की जिंदगी पर क्या होगा असर?
बता दें की आज इंटरनेट सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। बैंकिंग, यूपीआई पेमेंट, ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो स्ट्रीमिंग और क्लाउड डेटा जैसी तमाम सेवाएं इंटरनेट पर निर्भर हैं। अगर इंटरनेट नेटवर्क प्रभावित होता है तो सबसे पहले ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल सेवाओं में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। वीडियो कॉलिंग और स्ट्रीमिंग स्लो हो सकती है। कंपनियों के डेटा ट्रांसफर पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा शेयर बाजार और ई-कॉमर्स सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं। यानी यह संकट सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच सकता है।
क्या सच में इंटरनेट बंद कर सकता है ईरान?
एक्सपर्ट्स के अनुसार ईरान पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद नहीं कर सकता, लेकिन वह अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाली केबल्स पर दबाव जरूर बना सकता है। इंटरनेट नेटवर्क पूरी दुनिया में कई अलग-अलग रूट्स से जुड़े होते हैं। इसलिए एक रूट प्रभावित होने पर ट्रैफिक दूसरे रास्तों पर भेजा जा सकता है। हालांकि इससे स्पीड कम हो सकती है और लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि ईरान का यह बयान दुनियाभर की टेक कंपनियों और सरकारों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
दुनिया के सामने बढ़ी नई चुनौती
अमेरिका-ईरान तनाव ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि इंटरनेट, डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भी लड़े जा सकते हैं। तेल के बाद अब इंटरनेट नेटवर्क भी वैश्विक राजनीति का बड़ा हथियार बनता दिखाई दे रहा है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।



