Jantar Mantar CJP Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन आज मंगलवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गया है। जिससे यह आंदोलन शुरुआत में NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे पर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग का बड़ा अभियान बनता जा रहा है। इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने की खबर ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है।
भूख हड़ताल के तीसरे दिन गिरी ब्लड शुगर
जानकारी के लिए बता दें की कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में अचानक से सोनम वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल 66 दर्ज किया गया, जो सामान्य स्तर से कम माना जाता है। उनका ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन सैचुरेशन 96 प्रतिशत और पल्स रेट 92 रिकॉर्ड की गई। ऐसे में उनकी जांच कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि लगातार गर्मी के बीच बिना भोजन किए रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जिससे मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटा जा सके।
CJP ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि उनकी तबीयत और बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की होगी। उनका कहना है कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए, ताकि स्थिति सामान्य हो सके।
अभिजीत दिपके का सरकार पर हमला
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रेस से बातचीत में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोग किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” कहा गया और अब उनकी तुलना “वायरस” से की जा रही है। दिपके ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम वायरस नहीं हैं, बल्कि वायरस के खिलाफ वैक्सीन हैं। हमारा आंदोलन शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है।”

पेपर लीक के मामलों का उठाया मुद्दा
अभिजीत दिपके का कहना है कि यह आंदोलन केवल NEET परीक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल परीक्षा के कथित पेपर लीक का भी जिक्र किया और दावा किया कि जयपुर के एक कॉलेज से प्रश्नपत्र लीक हुआ था। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामले यह दिखाते हैं कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर कमियां हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में और अधिक छात्रों का नुकसान होगा।
छात्रों और अभिभावकों से की अपील
दिपके ने छात्रों और अभिभावकों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डर या दबाव की वजह से युवाओं को अपनी आवाज उठाने से नहीं रोकना चाहिए। उनका कहना था कि आज यदि छात्र शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग नहीं करेंगे तो भविष्य में उनकी परीक्षाएं, नौकरी और करियर सभी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र से जुड़ा सवाल है।
जंतर-मंतर पर एंट्री को लेकर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर में प्रवेश को लेकर भी विवाद सामने आया। अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि कई कोर टीम सदस्यों और समर्थकों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोगों के पास पहचान पत्र नहीं होने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी आम नागरिक को जंतर-मंतर जैसे सार्वजनिक प्रदर्शन स्थल पर जाने के लिए अनिवार्य रूप से पहचान पत्र दिखाना चाहिए।
भारी पुलिस तैनाती पर भी जताई नाराजगी
CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। दिपके का कहना है कि कई किसान नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ किसान नेताओं को घरों में ही रोक दिया गया, जबकि परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ उसी स्तर की कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
‘आंदोलन जारी रहेगा’
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि तमाम पाबंदियों और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होने तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
CJP का दावा है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या व्यक्ति का नहीं बल्कि उन लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता का प्रतीक है जो निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली चाहते हैं।
आखिर क्या है पूरा मामला?
CJP ने NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। आंदोलन अब 11वें दिन में पहुंच चुका है। इसी दौरान सोनम वांगचुक ने समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की, जिसका मंगलवार को तीसरा दिन रहा। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार से जवाबदेही तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।



