Census Self Enumeration: झारखंड में जनगणना 2027 की प्रक्रिया अब धीरे-धीरे जमीन पर उतरती नजर आ रही है. इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल तरीके से करने की तैयारी की गई है. इसी दिशा में राज्य में 1 मई से 15 मई तक ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसमें आम नागरिक खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए दर्ज कर सकेंगे. इस अभियान के लिए करीब 78 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो इस पूरे प्रक्रिया को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
क्या है स्व-गणना और क्यों है खास?
स्व-गणना का मतलब है कि अब नागरिक खुद अपने परिवार और घर से जुड़ी जानकारी सरकार के पोर्टल पर जाकर भर सकते हैं. इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी. भारत में पहली बार इतनी बड़ी आबादी के लिए डिजिटल जनगणना का प्रयोग किया जा रहा है, जो ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
कैसे करें स्व-गणना?
स्व-गणना के लिए नागरिकों को आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा. यह पोर्टल उपयोग में आसान बनाया गया है और इसमें 16 भाषाओं का विकल्प दिया गया है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के लोग आसानी से अपनी जानकारी भर सकें. जब कोई व्यक्ति अपनी जानकारी दर्ज करेगा, तो उसे एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी होगा. अगर कोई व्यक्ति पूरी जानकारी नहीं भर पाता है, तो वह उसे छोड़ सकता है। बाद में जनगणनाकर्मी उस जानकारी को पूरा कर देंगे.
33 बिंदुओं पर देनी होगी जानकारी
इस डिजिटल जनगणना में लोगों को कुल 33 बिंदुओं पर अपनी जानकारी देनी होगी. इनमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास की स्थिति, पानी की सुविधा, शौचालय, बिजली और अन्य कई जरूरी पहलुओं से जुड़े सवाल शामिल हैं. यह जानकारी सरकार के लिए नीतियां बनाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी.
दूसरा चरण: घर-घर जाकर गणना
स्व-गणना के बाद 16 मई से 14 जून तक जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा. इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों की गणना और सूचीकरण का काम करेंगे. इस चरण में मकान की स्थिति, पक्का या कच्चा, नाली की व्यवस्था, टीवी, फ्रिज, पानी की सुविधा, शौचालय जैसी सुविधाओं की जानकारी जुटाई जाएगी.
डेटा की सुरक्षा पर खास ध्यान
सरकार ने इस बार डेटा सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की है. जनगणना में दर्ज की जाने वाली सभी जानकारी को एन्क्रिप्शन तकनीक के जरिए सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा कम रहेगा. यह कदम लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
2027 में होगा अंतिम चरण
जनगणना का अंतिम और मुख्य चरण 9 फरवरी 2027 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा. इस दौरान देशभर में लोगों की गणना की जाएगी और विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे. संभावना यह भी जताई जा रही है कि इस बार जातिगत जनगणना को भी शामिल किया जा सकता है, जो लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है.
78 हजार कर्मियों की बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 78 हजार अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए हैं. इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं, तकनीकी मदद दें और घर-घर जाकर डेटा एकत्र करें. इतने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती इस अभियान की गंभीरता को दर्शाती है.
जालसाजी से सावधान रहने की सलाह
जनगणना निदेशालय ने लोगों को इस प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहने की सलाह भी दी है. लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना OTP या निजी जानकारी साझा न करें.अगर कोई जनगणनाकर्मी घर आता है, तो उसका आईडी कार्ड जरूर जांचें.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों पर समान फोकस
इस बार की जनगणना में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है. सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंच सके.
डिजिटल इंडिया की ओर एक और कदम
यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन को और मजबूत करती है. ऑनलाइन डेटा कलेक्शन से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी.
जनगणना क्यों है जरूरी?
जनगणना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसके जरिए सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि देश या राज्य में कितनी आबादी है, उनकी जरूरतें क्या हैं और किस क्षेत्र में किस तरह के विकास की जरूरत है.
लोगों की भागीदारी है जरूरी
इस अभियान की सफलता काफी हद तक लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी. अगर लोग सही और पूरी जानकारी देंगे, तो सरकार बेहतर योजनाएं बना सकेगी.
झारखंड में शुरू हो रहा यह स्व-गणना अभियान देश की जनगणना प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है. डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बनने की उम्मीद है. 1 से 15 मई तक चलने वाला यह अभियान न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लोग इस पहल में कितनी सक्रियता से भाग लेते हैं और यह डिजिटल जनगणना भविष्य में किस तरह के बदलाव लेकर आती है.
Read Related News: गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, Narendra Modi ने दी बड़ी सौगात,मेरठ से प्रयागराज 6 घंटे में



