Karnataka CM Swearing: कर्नाटक की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार आज राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं, शक्ति संतुलन और कांग्रेस नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों के बाद आखिरकार सत्ता परिवर्तन का यह अध्याय अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गया है। बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ मंत्रिपरिषद के पहले चरण में करीब 10 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई जा सकती है। साथ ही कांग्रेस राज्य में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए दो से तीन उपमुख्यमंत्री बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है, जिसमें वरिष्ठ दलित नेता जी परमेश्वर का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
सत्ता परिवर्तन के साथ नए दौर की शुरुआत
डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रहे सत्ता संतुलन के फार्मूले का हिस्सा भी माना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से राज्य की कमान संभाल रहे Siddaramaiah के बाद अब पार्टी ने शिवकुमार को नेतृत्व सौंपने का फैसला किया है। शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री पद की राह पूरी तरह साफ हो गई थी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी पकड़ कांग्रेस को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए मजबूत बनाएगी।
दिल्ली में चली मैराथन बैठकों का दौर
शपथ ग्रहण से पहले नई कैबिनेट के गठन को लेकर दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के आवास पर आयोजित बैठक में डीके शिवकुमार, सिद्दारमैया, Rahul Gandhi, केसी वेणुगोपाल और Randeep Singh Surjewala शामिल हुए। बैठक में मंत्रिमंडल की संरचना, विभागों के बंटवारे और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस नेतृत्व ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि नई सरकार में सभी वर्गों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
सिद्दारमैया समर्थकों को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को आश्वस्त किया है कि उनके समर्थक नेताओं और उनके प्रसिद्ध ‘अहिंदा’ सामाजिक समीकरण का पूरा ध्यान रखा जाएगा।अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़ा वर्ग और दलित) कर्नाटक की राजनीति का महत्वपूर्ण सामाजिक गठजोड़ माना जाता है। कांग्रेस इस समीकरण को मजबूत बनाए रखने के लिए कैबिनेट में इन वर्गों के नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह है कि नई सरकार में सामाजिक संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
जी परमेश्वर क्यों हैं डिप्टी सीएम की दौड़ में आगे?
कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री G. Parameshwara का नाम डिप्टी सीएम पद के लिए सबसे प्रमुख माना जा रहा है। परमेश्वर राज्य के सबसे वरिष्ठ दलित नेताओं में गिने जाते हैं और पार्टी संगठन में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से दलित समुदाय में सकारात्मक संदेश जाएगा और सरकार का सामाजिक आधार मजबूत होगा। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस एक से अधिक उपमुख्यमंत्री नियुक्त कर सकती है ताकि विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
पहले चरण में 10 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना
कर्नाटक में संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पहले चरण में लगभग 10 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी, जबकि बाकी विस्तार बाद में किया जाएगा। संभावित मंत्रियों में कई अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

नई कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
कर्नाटक भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से काफी विविध राज्य है। उत्तर कर्नाटक, दक्षिण कर्नाटक, तटीय क्षेत्र, हैदराबाद-कर्नाटक और ओल्ड मैसूर क्षेत्र की राजनीतिक आवश्यकताएं अलग-अलग हैं। इसी वजह से नई कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि किसी क्षेत्र या समुदाय को उपेक्षित महसूस हो। सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के चयन में जातीय समीकरणों के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक योगदान को भी महत्व दिया गया है।
डीके शिवकुमार के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद डीके शिवकुमार के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास, निवेश आकर्षित करना, किसानों की समस्याएं, रोजगार सृजन और शहरी प्रबंधन प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। विशेष रूप से बेंगलुरु की ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी समस्याएं लंबे समय से सरकारों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा कांग्रेस द्वारा किए गए चुनावी वादों को पूरा करना भी नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
शपथ के बाद हो सकती हैं बड़ी घोषणाएं
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद डीके शिवकुमार अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कुछ महत्वपूर्ण लोककल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि किसानों, महिलाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा। हालांकि इन योजनाओं की आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण के बाद ही की जाएगी।
समारोह के लिए विशेष तैयारियां
बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने कई मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य सरकार ने विधान सौधा, विकास सौधा और कुछ अन्य सरकारी परिसरों में आधे दिन का अवकाश भी घोषित किया है ताकि समारोह का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।
कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
डीके शिवकुमार लंबे समय से कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। कर्नाटक में पार्टी को मजबूत करने, विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीतियों को सफल बनाने में उनकी भूमिका को कांग्रेस नेतृत्व लगातार सराहता रहा है। उनका मुख्यमंत्री बनना पार्टी के लिए केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का प्रयास भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिवकुमार प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी प्रदर्शन करते हैं तो यह कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक संदेश होगा।
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