Mamata Banerjee TMC Split: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अब तक की सबसे बड़ी अंदरूनी चुनौती खड़ी हो गई है। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी पार्टी के कई सांसद नेतृत्व से नाराज हैं और संसद में अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजनीतिक गलियारों में यह भी दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के करीब 22 सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद इन खबरों ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी माहौल गर्म कर दिया है।
दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
आने वाले दिनों में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (India) की महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में होने वाली है। इसी बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी राजधानी पहुंचने वाले हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य लगातार राजनीतिक बैठकों में व्यस्त बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में चल रही हलचल का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
भाजपा नेताओं के दावों से बढ़ी चर्चा
भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि टीएमसी के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और लगातार संपर्क में हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता लॉकेट चटर्जी ने भी कहा कि चुनावी नतीजों के बाद कई नेता नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। टीएमसी की ओर से भी अभी तक किसी बड़े टूट की संभावना को स्वीकार नहीं किया गया है।
काकोली घोष दस्तीदार के नाम की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बारासात लोकसभा सीट से सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुखता से लिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि असंतुष्ट सांसदों के बीच उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। काकोली घोष या उनके समर्थकों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।

कई सांसदों से संपर्क नहीं होने की खबर
राजनीतिक हलकों में उस समय और अधिक चर्चाएं शुरू हो गईं जब कुछ सांसदों से संपर्क नहीं हो पाया। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कई सांसदों के फोन बंद पाए गए, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला। इन सांसदों में कुछ चर्चित चेहरे, फिल्मी जगत से जुड़े नेता, पूर्व खिलाड़ी और पहली बार संसद पहुंचे सांसद भी बताए जा रहे हैं। हालांकि फोन बंद होने के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।
क्या कहता है दलबदल कानून?
भारतीय राजनीति (Indian Politics) में किसी भी दल के सांसदों या विधायकों के लिए दलबदल कानून बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि कोई समूह अलग होकर अपनी सदस्यता बचाना चाहता है, तो उसे पार्टी के कुल सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में पार्टी के 13 सदस्य मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी अलग गुट को कानूनी मान्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त संख्या जुटानी होगी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि दो-तिहाई संख्या पूरी नहीं होती है तो संबंधित सांसदों की सदस्यता पर खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि किसी भी संभावित बगावत में संख्या का गणित सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टीएमसी के लिए क्यों अहम है यह मामला?
पश्चिम बंगाल में टीएमसी (TMC in West Bengal) लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। लेकिन यदि सांसदों के असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं, तो यह पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसके अलावा, विपक्षी गठबंधन (Opposition Alliance) में टीएमसी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की टूट या असंतोष राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
देखा जाए तो अब सभी की निगाहें अगले कुछ दिनों पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि असंतुष्ट सांसद जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। वहीं टीएमसी नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इन सभी दावों को राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाएगा। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें कितनी सच हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते असंतुष्ट नेताओं को साधने में सफल रहता है, तो संकट टल सकता है। लेकिन यदि मतभेद बढ़ते हैं, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
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