Manipur Violence: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच कांगपोकपी जिले से एक बार फिर से हिंसा की खबर सामने आई है। बता दें आज मंगलवार को सुबह करीब 4 बजे हथियारबंद हमलावरों ने टापन खुल्लेन, टापन खुनौ और मकुई पिपुराम गांवों में हमला किया। इन गांवों में मुख्य रूप से लियांगमेई नागा समुदाय के लोग रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों ने पहले गोलीबारी की और इसके बाद कई घरों तथा दूसरी संपत्तियों में आग लगा दी।
ऐसे में घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथ ही, स्थानीय स्तर पर इस हिंसा में करीब 30 घरों को आग के हवाले किया गया। इसके अलावा कई वाहनों और अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। वही, गोलीबारी में एक ग्रामीण के घायल होने की सूचना है। आइए
कई घंटे तक जारी रही गोलीबारी
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों के मौके पर पहुंचने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच फायरिंग तुरंत बंद नहीं हुई। बताया गया है कि गोलीबारी करीब दोपहर 12:30 बजे तक जारी रही। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मणिपुर पुलिस के साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF और उसकी कोबरा यूनिट के जवानों को इलाके में भेजा गया।
सुरक्षा बलों ने प्रभावित गांवों और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया है। जवानों की तैनाती बढ़ाए जाने के बाद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता इलाके में दोबारा हिंसा फैलने से रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घटना के बाद प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल है। बड़ी संख्या में घरों के जलने से कई परिवारों के सामने रहने और जरूरी सामान की समस्या भी पैदा हो सकती है। सुरक्षा बलों की ओर से इलाके में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
एक दिन पहले तीन कुकी नागरिकों की मौत
कांगपोकपी में मंगलवार को हुई हिंसा से ठीक एक दिन पहले सोमवार को भी गोलीबारी की घटना सामने आई थी। तैखांग कुकी गांव में हुई इस घटना में दो महिलाओं समेत तीन कुकी नागरिकों की मौत हो गई थी। गोलीबारी में चार अन्य लोग घायल हुए थे।
वहीं, लगातार दो दिनों में हुई हिंसक घटनाओं ने कांगपोकपी और आसपास के इलाकों में तनाव और बढ़ा दिया है। एक तरफ कुकी नागरिकों की मौत और दूसरी तरफ नागा गांवों में आगजनी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव
कांगपोकपी-तामेंगलोंग क्षेत्र में कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति रही है। अलग-अलग मौकों पर दोनों समुदायों से जुड़े इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल के घटनाक्रमों ने इस तनाव को और गहरा कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, 13 मई के बाद से दोनों समुदायों से जुड़ी अलग-अलग हिंसक घटनाओं में कम से कम 17 लोगों की जान जा चुकी है। 27 अगस्त को हुए एक कथित घात में चार नागा नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद 31 अगस्त की घटना में तीन कुकी नागरिक मारे गए। अब 1 सितंबर को तीन लियांगमेई नागा गांवों में आगजनी और गोलीबारी की घटना सामने आई है। ऐसे में लगातार हो रही हिंसा से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और कितना मजबूत करना होगा। स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
सुरक्षा बलों ने बढ़ाई निगरानी
मंगलवार की घटना के बाद पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हमले में कितने लोग शामिल थे और हिंसा के पीछे क्या कारण था। फिलहाल प्रशासन की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी नई हिंसक घटना को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
मणिपुर में पहले भी जातीय हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में कांगपोकपी की ताजा घटना ने एक बार फिर राज्य में स्थायी शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था इस बात के लिए अहम होगी कि तनाव को और बढ़ने से कैसे रोका जाता है।
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