Mathura News: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर संत समाज की गतिविधियां भी तेज होने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है मथुरा की चित्रगुप्त पीठ से जुड़े संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कारसेवा करने का ऐलान किया है। इसके लिए 6 दिसंबर की तारीख तय किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कारसेवा की अनुमति मांगे जाने का दावा किया गया है। साथ ही संत समाज की ओर से श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनाने का संकल्प भी जताया गया है। इस दौरान ‘कृष्ण लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ जैसे नारे लगाए गए। जिसमें संतों का कहना है कि जिस तरह अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण के लिए भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए।
CM योगी से मांगी गई कारसेवा की अनुमति
स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे गए पत्र में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर अभियान चलाने की बात कही गई है। जिससे पत्र में दावा किया गया है कि संत समाज मथुरा की ओर कूच करेगा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि संत समाज इस अभियान से पीछे नहीं हटेगा। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मुख्यमंत्री से कारसेवा के कार्यक्रम के लिए अनुमति देने और सहयोग करने की अपील की है।
ऐसे में संतों का कहना है कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आएं। उनका दावा है कि मंदिर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक बड़ा प्रतीक बनेगा।
पुलिस-प्रशासन को लेकर भी लगाए आरोप
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में जिला प्रशासन और पुलिस को लेकर भी शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। जिसमें स्वामी सच्चिदानंद महाराज का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी संतों को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं और पुलिसकर्मियों पर साधु-संतों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह जरुरी होगा। ऐसे में संतों का कहना है कि प्रशासनिक दबाव के बावजूद उनका अभियान जारी रहेगा। उन्होंने 6 दिसंबर को बड़ी संख्या में साधु-संतों के मथुरा पहुंचने और कारसेवा करने की बात कही है।
शिलाग्राम के पत्थर गायब होने का भी दावा
स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों में यह भी कहा गया है कि कारसेवा के कार्यक्रम के लिए कुछ शिलाग्राम पत्थर मंगाए गए थे। साथ ही यह भी दावा है इन पत्थरों को रात के समय में अचानक वहां से हटा दिया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में इस पूरे मामले में सामने आने वाले सभी पक्षों को देखना अहम होगा।
9 अगस्त से शुरू होगा अभियान
संत समाज की ओर से 9 अगस्त को अभियान के शुरुआती कार्यक्रम की घोषणा की गई है। बताया गया है कि इस दिन साधु-संत और श्रद्धालु चित्रगुप्त पीठ आश्रम में एकत्रित होंगे।
कार्यक्रम के अनुसार सुबह 9 बजे यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिला पूजन किए जाने की बात कही गई है। दोपहर करीब 12 बजे शंखनाद करके आगे की रणनीति और अभियान से जुड़ी जानकारी देने का दावा किया गया है। संतों की ओर से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाने वाली विशेष शिला तैयार कराने की भी बात कही गई है। इसमें आकर्षक नक्काशी होने का दावा किया गया है।

6 दिसंबर पर क्यों टिकी नजर?
मथुरा में कारसेवा के लिए 6 दिसंबर की तारीख घोषित किए जाने से इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा बढ़ सकती है। बता दें अयोध्या आंदोलन के इतिहास में भी 6 दिसंबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में मथुरा में इसी तारीख को कारसेवा की घोषणा किए जाने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ सकती है। फिलहाल संत समाज अपने अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, इस पूरे कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की अनुमति और आधिकारिक रुख पर नजर रहेगी।
आखिर क्या है संत समाज की मांग?
संत समाज की मुख्य मांग श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े धार्मिक स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर है। जिसमें संतों का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब मथुरा में भी कृष्ण मंदिर के निर्माण होना चाहिए। हालांकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मामला लंबे समय से कानूनी और सामाजिक चर्चा का विषय रहा है। इसलिए प्रस्तावित कारसेवा के ऐलान के बाद आगे की गतिविधियां प्रशासनिक अनुमति, कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण होंगी।
ऐसे में अब देखना यह होगा कि 9 अगस्त से शुरू होने वाले अभियान को लेकर प्रशासन का क्या रुख रहता है और 6 दिसंबर को प्रस्तावित कारसेवा के ऐलान पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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