अंतिम चरण में पहुंचा निर्माण कार्य
कटनी जिले में बन रही यह जल सुरंग लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी है, जिसे देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में गिना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सुरंग का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल अंतिम एक मीटर हिस्से का काम बाकी है। इसके पूरा होते ही परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव इसी प्रगति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को परियोजना स्थल पहुंचेंगे।
नर्मदा का पानी पहुंचेगा सोन नदी बेसिन तक
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके माध्यम से नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर सोन नदी बेसिन तक पहुंचाया जाएगा। पूरी व्यवस्था गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) आधारित होगी। यानी पानी को पहुंचाने के लिए अतिरिक्त बिजली या पंपिंग की आवश्यकता नहीं होगी। इससे ऊर्जा की बचत होगी और परियोजना लंबे समय तक कम लागत में संचालित की जा सकेगी। विशेषज्ञ इसे जल प्रबंधन और इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मान रहे हैं।
छह जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के छह जिलों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इन जिलों में जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन जिलों के करीब 1,450 गांवों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम होगी और पूरे वर्ष खेती करना आसान हो सकेगा।
खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद
विंध्य और महाकौशल क्षेत्र लंबे समय से पानी की कमी और अस्थिर सिंचाई व्यवस्था की समस्या से जूझते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने के बाद किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। इससे गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि
सरकार इस परियोजना को केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी मान रही है। करीब 12 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण विंध्य पर्वतमाला के नीचे किया गया है, जो तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी लंबी जल सुरंग का निर्माण देश में अपनी तरह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
जल संसाधनों का बेहतर उपयोग
इस परियोजना का उद्देश्य केवल सिंचाई बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी है। नर्मदा बेसिन में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचाकर उन इलाकों को लाभ पहुंचाया जाएगा, जहां सिंचाई की जरूरत अधिक है। इससे जल वितरण में संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी।
ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी उपलब्ध होने से किसान एक की बजाय दो या तीन फसलें भी ले सकेंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इसके अलावा पशुपालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री करेंगे परियोजना की समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करेंगे। वे निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों से चर्चा करेंगे और अंतिम चरण के कार्यों की जानकारी लेंगे। संभावना है कि परियोजना को जल्द पूरा कर किसानों को इसका लाभ देने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि यह महत्वाकांक्षी योजना तय समय पर पूरी होकर जल्द संचालन में आ जाए।
प्रदेश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल है और यहां सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता रहा है। स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना के पूरा होने से न केवल लाखों किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य में जल प्रबंधन, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के विकास की आधारशिला साबित हो सकती है।
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