Bhojshala Supreme Court Verdict: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर (Bhojshala-Kamal Maula Complex) पर काफी समय से विवाद चल रहा है, जिसपर अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। दरअसल, कोर्ट ने फिलहाल के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) को हिंदू मंदिर मानते हुए पूजा-पाठ की अनुमति दी गई थी। इस फैसले पर SC ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील स्वीकार करते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है। ऐसे में यहां पढ़ें इस मामले से जुड़ी हर एक जरूरी जानकारी क्या है?
जानें भोजशाला परिसर पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने साफ तौर पर कहा है कि कि फिलहाल ऐसा कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जाएगा, जिससे भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) के भीतर नमाज की अनुमति मिल सके। अदालत ने यह भी कहा है कि मामले की अंतिम सुनवाई होने तक मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) उसकी अनुमति के बिना परिसर में किसी तरह का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। ऐसा करने से विवादित स्थल की वर्तमान स्थिति नियंत्रण में रहेगी और मामले की सही तरह से जांच में समय मिल सकेगा।
Supreme Court issues notice to Centre, Madhya Pradesh government on a batch of appeals filed by the Muslim side challenging High Court verdict, which held disputed 11th-century Bhojshala-Kamal Maula complex in Dhar district as a temple dedicated to Goddess Saraswati.
Supreme… pic.twitter.com/rNlQTbCz3p
— ANI (@ANI) July 14, 2026
मुस्लिम पक्ष को मिली सीमित राहत
बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष को परिसर के भीतर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत एक राहत जरूर दी है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिए है कि भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) से सटे खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय (Muslim community) को जुमे की नमाज अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी साफ कहा है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर (Temple of Goddess Saraswati) माना गया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष को नियमित पूजा-पाठ की अनुमति मिली थी। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई करेगा और इसपर अंतिम फैसला आने तक हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगेगी।
क्या है भोजशाला विवाद? (What is the Bhojshala Dispute?)
बताया जा रहा है कि धार जिले में स्थित भोजशाला 11वीं सदी का एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का परिसर है, जिसपर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर (Ancient Temple of Goddess Saraswati) है, जहां राजा भोज के समय पूजा होती थी। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह कमाल मौला मस्जिद (Kamal Maula Mosque) है और यहां वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है। इसी विवाद को लेकर कई सालों से अदालतों में कानूनी लड़ाई चल रही है, जिसपर अभी तक कोई साफ न्याय नहीं मिला है।
ASI को भी मिला निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी साफ निर्देश दिए हैं कि अदालत की अनुमति के बिना भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में किसी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ या संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक स्थल की मौजूदा स्थिति को सुरक्षित रखना है।
अगली सुनवाई में होगा साफ विचार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मुस्लिम पक्ष की अपील पर विस्तार से सुनवाई करेगा। इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों पर भी विचार किया जाएगा। वहीं, अदालत के आदेश के अनुसार, हिंदू पक्ष की पूजा व्यवस्था जारी रहेगी, जबकि मुस्लिम समुदाय को परिसर से सटे खुले स्थान पर तय समय के दौरान जुमे की नमाज (Friday Prayers) अदा करने की सुविधा मिलेगी। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस विवाद के कानूनी और ऐतिहासिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा।



