NEET Exam: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर देशभर में उठे सवालों के बीच मंगलवार (1 जुलाई) को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की एक अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समिति के सामने री-एग्जाम से मिले अनुभव, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में बहस जारी है। पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने मूल परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया था। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हुए, जिनकी समीक्षा अब संसद की समिति करेगी।
शिक्षा मंत्रालय देगा विस्तृत प्रस्तुति
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी समिति के सामने विस्तृत प्रस्तुति देंगे। अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि री-एग्जाम आयोजित करने के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या नई व्यवस्था तैयार की गई है। समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव किए जा रहे हैं।
NTA सुधारों पर होगी विशेष चर्चा
बैठक का सबसे अहम विषय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रस्तावित सुधार होंगे। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद केंद्र सरकार ने NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन कर रहे हैं। बैठक में वे भी NTA को मजबूत बनाने के लिए तैयार की गई सिफारिशों और उनके क्रियान्वयन की स्थिति से संसदीय समिति को अवगत कराएंगे।
री-एग्जाम से क्या सीखा?
सरकारी सूत्रों के अनुसार संसदीय समिति यह जानना चाहती है कि जून में आयोजित री-एग्जाम से क्या महत्वपूर्ण अनुभव मिले। समिति इस बात पर भी चर्चा करेगी कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, निगरानी व्यवस्था, अभ्यर्थियों की सुविधा और परीक्षा संचालन में किन सुधारों की आवश्यकता महसूस हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि री-एग्जाम केवल एक परीक्षा नहीं था, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा दोबारा कायम करने की भी बड़ी चुनौती थी।
पेपर लीक के बाद बढ़ी चिंता
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। इसके बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है और कई राज्यों में जांच जारी है। इसी विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग तेज हो गई थी।
छात्रों की पारदर्शिता की मांग
देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में केवल प्रश्नपत्र की सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को आधुनिक तकनीक और मजबूत निगरानी व्यवस्था से जोड़ना भी आवश्यक है।
NTA ने किए कई बदलाव
री-एग्जाम के दौरान NTA ने कुछ बदलाव भी लागू किए। इनमें परीक्षा की अवधि बढ़ाना, प्रश्न पुस्तिका में रफ वर्क के लिए अधिक जगह देना और अभ्यर्थियों की सुविधा बढ़ाने जैसे कदम शामिल थे। एजेंसी का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों के तनाव को कम करना और परीक्षा को अधिक व्यवस्थित बनाना था। हालांकि परीक्षा सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार अभी भी सबसे बड़ा मुद्दा बने हुए हैं।
AI और डिजिटल तकनीक पर भी होगी चर्चा
संसदीय समिति की बैठक में केवल NEET ही नहीं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर भी चर्चा होगी। समिति यह समझने की कोशिश करेगी कि भविष्य में परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और निगरानी में नई तकनीकों का किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
भविष्य की परीक्षा प्रणाली कैसी होगी?
बैठक में यह भी विचार किया जा सकता है कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी, डेटा विश्लेषण और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किस प्रकार किया जाए। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से परीक्षा के प्रारूप में किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
छात्रों के लिए क्या मायने रखती है यह बैठक?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का उद्देश्य केवल पिछले विवादों की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान तैयार करना भी है। यदि समिति की सिफारिशों पर प्रभावी ढंग से अमल किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती हैं।
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