Nepal Flash Flood: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Nepal Flash Flood 2026) ने बड़े स्तर पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद नेपाल की ओर से जलवायु परिवर्तन और विकसित देशों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने फ्लैश फ्लड के बाद कहा था कि उनका देश जलवायु संकट की बड़ी कीमत चुका रहा है, जबकि नेपाल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वैश्विक स्तर पर बेहद कम है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से अधिक जिम्मेदार देशों से कमजोर और प्रभावित देशों की मदद करने की अपील की थी।
चीन, अमेरिका और भारत का किया था जिक्र
नेपाल के विदेश मंत्री ने अपने बयान में चीन, अमेरिका और भारत का विशेष तौर पर जिक्र किया था। उनका कहना था कि इन देशों का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन काफी अधिक है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से नेपाल जैसे कमजोर देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रभावित देशों को आर्थिक मदद दिए जाने की बात कहते हुए इसे केवल दान का विषय नहीं माना था। उनके मुताबिक, जलवायु संकट से प्रभावित देशों की मदद करना जिम्मेदार देशों की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी होनी चाहिए। इस बयान के बाद भारत और नेपाल के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।
भारत के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
नेपाल की मांग को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने मौजूद एक साझा चुनौती है।
भारत का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विकासशील देशों को सहायता मिलनी चाहिए और इस दिशा में विकसित देशों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। भारत ने इस मुद्दे को किसी एक देश के खिलाफ आरोप के तौर पर देखने के बजाय वैश्विक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल में आई आपदा के समय भारत ने पड़ोसी देश के साथ एकजुटता दिखाई है और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है।
भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
भारत ने कहा कि नेपाल के मुश्किल समय में वह उसके साथ खड़ा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, एक करीबी पड़ोसी, दोस्त और साझेदार होने के नाते भारत ने आपदा के बाद तुरंत प्रतिक्रिया दी।
भारत का कहना है कि नेपाल में राहत, पुनर्निर्माण और रिकवरी की प्रक्रिया में आगे भी सहयोग जारी रखा जाएगा। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और ऐसे संकट के समय एक-दूसरे का साथ देना इन रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

नेपाल ने बाद में दी सफाई
विदेश मंत्री शिशिर खनाल के शुरुआती बयान के बाद नेपाल की ओर से स्पष्टीकरण भी सामने आया। नेपाल ने कहा कि सरकार ने भारत, चीन या अमेरिका से अलग-अलग तौर पर किसी विशेष मुआवजे की मांग नहीं की है।
नेपाल के अनुसार, अपील का उद्देश्य पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की ओर आकर्षित करना था। जिसमें नेपाल चाहता है कि वैश्विक समुदाय जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को गंभीरता से समझे और प्रभावित देशों के लिए लंबे समय तक सहयोग की व्यवस्था करे।
जलवायु संकट ने बढ़ाई चिंता
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़े खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी देशों के लिए अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और अत्यधिक बारिश जैसी घटनाएं बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
नेपाल जैसे कम उत्सर्जन वाले देशों का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन में उनका योगदान कम होने के बावजूद उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। इसी वजह से जलवायु न्याय, आर्थिक सहायता और आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग लगातार उठती रही है। फिलहाल भारत ने नेपाल की मुआवजे से जुड़ी मांग पर सीधे विवाद में जाने के बजाय जलवायु परिवर्तन को साझा चुनौती बताते हुए प्रभावित विकासशील देशों की मदद की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही भारत ने नेपाल के साथ खड़े रहने और उसकी रिकवरी में सहयोग जारी रखने की बात कही है।
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