Pakistan Student Protest: भारत में छात्रों के आंदोलनों की चर्चा के बीच अब पाकिस्तान में भी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर युवाओं का विरोध तेज होता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है की सिंध प्रांत के हैदराबाद में छात्र और युवा लंबे समय से सिंध पब्लिक सर्विस कमीशन (SPSC) की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को भारत में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि पाकिस्तान में किसी नए संगठन का औपचारिक गठन हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और रील्स के जरिए पाकिस्तान के युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती की मांग उठाई है।
सिंध में परीक्षा परिणाम पर उठे सवाल
मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2024 में आयोजित सिंध पब्लिक सर्विस कमीशन (SPSC) की परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और स्थानीय युवाओं के साथ कथित भेदभाव हुआ। ऐसे में इन आरोपों के बाद मामला सिंध हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने मई महीने में परीक्षा परिणाम पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद से अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
छात्र संगठन चला रहे हैं आंदोलन
सिंध स्टूडेंट एक्शन कमेटी सहित कई छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया की जांच और दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारी सिंध पब्लिक सर्विस कमीशन के कार्यालय के बाहर धरना देकर बैठे हैं।
छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के करीबी उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया, जबकि योग्य अभ्यर्थियों को नजरअंदाज किया गया।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तान के कई युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वीडियो और रील्स साझा किए हैं। इनमें कुछ यूजर्स ने भारत में हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपने देश में शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उन्हें केवल सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
युवाओं ने जताया डर
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में कुछ युवाओं ने दावा किया है कि पाकिस्तान में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करना आसान नहीं है। उनका कहना है कि सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का डर उन्हें खुलकर प्रदर्शन करने से रोकता है। जिनमें कुछ पोस्ट में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस पर संबंधित अधिकारियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

पारदर्शी भर्ती की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अगर परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर परीक्षा दोबारा आयोजित की जाए।
ऐसे में छात्रों का मानना है कि सरकारी नौकरियों में चयन केवल योग्यता के आधार पर होना चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।
भारत और पाकिस्तान के युवाओं के मुद्दों में समानता
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण एशिया के कई देशों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता युवाओं के लिए बड़ा मुद्दा बन चुकी है। भारत हो या पाकिस्तान, दोनों देशों में नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवा निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग करते रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए आंदोलनों की प्रकृति और उनका प्रभाव भी अलग-अलग हो सकता है।
सोशल मीडिया बना आंदोलन का माध्यम
दरअसल आज के समय में सोशल मीडिया किसी भी मुद्दे को तेजी से लोगों तक पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। पाकिस्तान में भी कई युवा इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं को अपनी समस्याएं सामने रखने का अवसर देते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर दावे को सत्य मानने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
ऐसे में यदि प्रदर्शन जारी रहता है तो पाकिस्तान की संबंधित संस्थाओं पर जांच पूरी करने और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने रखने का दबाव बढ़ सकता है। वहीं छात्र संगठन लगातार निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा की मांग दोहरा रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सिंध हाईकोर्ट के निर्देशों और सरकारी कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में आगे क्या फैसला आता है।



